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शुरू हुई पढ़ाई तो आई स्कूलों में रौनक, पहले दिन कम पहुंचे बच्चे

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केदारनाथ महिला इंटर कॉलेज में पढ़ती छात्राएं। संवाद - फोटो : BADAUN
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बदायूं। कोरोना संक्रमण के कारण पिछले कई महीने तक बंद रहने के बाद सोमवार को कक्षा नौ से 12वीं तक सभी बोर्डों के स्कूल खुल गए। हालांकि पहले दिन स्कूलों में बच्चों की संख्या 30 प्रतिशत के करीब रही। कोरोना के चलते सोमवार को कक्षाओं में बदला-बदला नजारा रहा। कक्षाओं में बच्चे मास्क लगाने के साथ सामाजिक दूरी बनाकर बैठे। स्कूल में प्रवेश के समय बच्चों के हाथों को सैनिटाइज कराया गया।
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जिले में फिलहाल एक सक्रिय संक्रमित मरीज बचा है। इसलिए शासन के निर्देश पर सोमवार से कक्षा नौ से 12 तक के सभी स्कूल खोल दिए गए। संख्या के आधार पर बच्चों को दो पालियों में बुलाने का आदेश है। हालांकि पहले दिन सोमवार को उम्मीद से काफी कम बच्चे स्कूल पहुंचे। इसकी वजह यह रही कि कोरोना की वजह से कुछ अभिभावक अभी अपने बच्चोें को स्कूल भेजने से हिचकिचा रहे हैं।
पिछले कई दिनों से स्कूलों में साफ सफाई चल रही थी। सोमवार सुबह निर्धारित समय पर बच्चों के स्कूल पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। पहले दिन ज्यादातर अभिभावक खुद बच्चों को स्कूल छोड़ने गए। विद्यालयों में भी कोविड-19 नियमों का पालन किया गया। स्कूल में प्रवेश के समय सभी छात्र- छात्राओं के हाथ सैनिटाइज कराए गए। थर्मल स्क्रीनिंग भी की गई। कक्षाओं में बच्चों को सामाजिक दूरी के हिसाब से बैठाया गया।
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कान्वेंट स्कूलों में नहीं दिखी खास रौनक
शासन के निर्देश पर कक्षा नौ से 12 तक के स्कूलों को खोल दिया गया है। इसके तहत कान्वेंट स्कूलों में भी छात्र-छात्राएं पहुंचे। इनकी संख्या बेहद सीमित रही, इसलिए स्कूलों में खास रौनक देखने को नहीं मिली।
क्लासरूम में पढ़ाई बेहतर होती है। क्योंकि ऑनलाइन पढ़ाई में नेटवर्क खराब होने की वजह से काफी कुछ समझ में नहीं आता है। ऐसे में अधूरी ही जानकारी मिल पाती है। हम लोगों को ज्यादा दिक्कत होती थी।
- शगुन चौहान, छात्रा
यह अच्छी बात है कि स्कूल खुल गए हैं। स्कूल में शिक्षकों के सामने पढ़ाई करने से पढ़ाई का तरीका बदल जाता है, ऐसे में पढ़ाया हुआ अधिकांश पाठ समझ में आता है, लेकिन ऑनलाइन पढ़ाई में काफी दिक्कतें हैं।
निखिल भारद्वाज, छात्र
ऑफलाइन पढ़ाई से समझ में अच्छे से आता है, क्योंकि ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान शिक्षक कुछ पढ़ा रहे हैं और किसी ने कुछ बोल दिया तो वह समझ में नहीं आता है। वहीं नेटवर्क तो सबसे बड़ी परेशानी है ही।- मंजीत, छात्र
शासन की तरफ से स्कूलों को खोलने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत आज से स्कूलों में पढ़ाई शुरू हो गई। लेकिन पहले दिन बेहद कम संख्या में छात्र आए हैं। ऐसे में अभिभावकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।- सीपी सिंह, प्रधानाचार्य राजकीय इंटर कॉलेज
पहले दिन बेहद कम संख्या में छात्राएं स्कूल आए हैं। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में स्कूलों में छात्राओं की संख्या में इजाफा होगा। क्योंकि अभी अभिभावकों के मन में कुछ संकोच है। -अमलेश गुप्ता, प्रधानाचार्य, केदारनाथ महिला इंटर कॉलेज
स्कूल खुलने के बाद पहले दिन बच्चों की संख्या न के बराबर ही रही है। हालांकि दोनों पालियों में बच्चे आए हैं, यह अच्छी बात है। सभी बच्चों को कोविड-19 के नियमों के अनुसार ही कक्षाओं में दूर-दूर बैठाया गया है। -चंद्रपाल सिंह, प्रधानाचार्य, कुमारी मंजूलता मेमोरियल इंटर कॉलेज
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