बदायूं। जिला कारागार में अब तक कई बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं लेकिन कभी सुरक्षा के लिहाज से ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। इसकी जरूरत तब पड़ी जब 2018 में शातिर अपराधी सुमित जेल की दीवार फांदकर फरार हो गया। उसके बाद जेल की चाहरदीवारी पर ब्लेडयुक्त तार लगवाए गए। इसके अलावा अंदर सुरक्षा बढ़ाई गई। तब से अब तक कोई अनहोनी सामने नहीं आई है।
2018 से पहले जिला कारागार की चाहरदीवारी पर तारकशी नहीं थी। मुरादाबाद के शातिर अपराधी सुमित ने इसी का फायदा उठाया था। उसने मुरादाबाद पेशी पर जाने के दौरान जिला कारागार से भागने की योजना बनाई थी। उसकी योजना के मुताबिक 13 मई 2018 की रात करीब आठ बजे उसे फरार कराने वाले जेल के पीछे खाली पड़ी जगह में पहुंचे थे। उन्होंने टार्च का फोकस आसमान में दिखाकर संकेत दिया था। तभी सुमित और कुख्यात अपराधी देवकी नंदन उर्फ चंदन सिंह जेल की दीवार के नजदीक पहुंचे थे। उस दौरान सुमित तो फरार होने में कामयाब हो गया लेकिन चंदन सिंह दीवार से गिर गया। इससे उसके चोट भी आई और उसने पिस्टल से एक होमगार्ड पर फायर भी किया था। हालांकि तब से सुमित का कुछ पता नहीं लगा है लेकिन जेल में सुरक्षा की सबसे बड़ी चूक थी। इसको जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया था। उसी समय जेल के ऊपर तारकशी कराई गई। चाहरदीवारी पर ब्लेडयुक्त तार लगवाए गए हैं, जिसके लगने से हाथ पैर कटना लाजिमी है।
दो लाख रुपये का इनामी है सुमित
शातिर अपराधी सुमित अब जिले का नंबर वन अपराधी हो चुका है। उस पर पुलिस की ओर से दो लाख रुपये का इनाम घोषित है लेकिन अभी तक उसका कुछ पता नहीं चला है। उसकी तलाश के लिए पुलिस की टीमें लगी हुई हैं।
जिला कारागार में नहीं है हाई सिक्योरिटी बैरक
जिला कारागार में कोई हाई सिक्योरिटी बैरक नहीं है। जहां पेशेवर या बड़े अपराधियों को अलग से रखा जा सके। इस समय गैर जिलों के करीब 10 अपराधी जेल में बंद हैं। उन पर ज्यादा मामले तो नहीं है। हालांकि उन्हें बदायूं जिले के अपराधियों के साथ रखा गया है।
संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी दो बंदियों की मौत
31 मई 2018 को जिला कारागार में दो बंदियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उनके मुंह से झाग निकल रहे थे। माना गया था कि उन्होंने जहर खाकर आत्महत्या की है। जहर जेल के अंदर कैसे पहुंचा। आज तक इसका खुलासा नहीं हुआ है।
जेल में कराई गई चेकिंग
चित्रकूट जेल की घटना को लेकर जिला कारागार में शनिवार को चेकिंग कराई गई। एक-एक वैरिक की तलाशी ली गई लेकिन इस दौरान कोई आपत्तिजनक वस्तु नहीं मिली। बंदी रक्षकों को और कड़ी नजर रखने को कहा गया है।
जिला कारागार में समय-समय पर तलाशी कराई जाती है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी स्वयं आकर तलाशी कराते हैं। हम स्वयं भी हर बात पर गौर करते हैं। इस समय वैसे भी मुलाकात नहीं हो रही है। इसके बावजूद जेल की सुरक्षा पर नजर बनाए हुए हैं। - डॉ. विनय कुमार, जेल अधीक्षक