बदायूं। जिला अस्पताल परिसर में बृहस्पतिवार को भी डेंगू के दो रोगी मिले हैं। इसके साथ ही जिला अस्पताल डेंगू के लिहाज से रेड जोन में चला गया है। शहर का मोहल्ला नेकपुर भी डेंगू के छह मामलों के साथ रेड जोन में हैं। जालंधरी सराय और आदर्श नगर में भी दो-दो मामले मिले हैं। दहगवां और जगत ब्लॉक भी डेंगू के लिहाज खतरनाक जोन में हैं।
मच्छरजनित बीमारियों के लिहाज से बदायूं पिछले दो साल से हाईरिस्क श्रेणी में शामिल है। इसके बावजूद बदायूं में मलेरिया विभाग को फॉगिंग के लिए बजट नहीं मिल रहा। गौर करने वाली बात यह है कि शासन स्तर से मलेरिया विभाग के लिए पायरेथ्रेम तो उपलब्ध करा दी गई, लेकिन इसकी फॉगिंग के लिए मिट्टी का तेल नहीं दिया गया। ऐसे में एक बार फिर जिले में मलेरिया के साथ डेंगू का प्रकोप भी बढ़ने लगा है। पिछले 20 दिन की बात करें तो डेंगूू के लिहाज से जिले में चार रेड जोन बन गए हैं। इनमें डेंगू के 10 रोगियों के साथ जिला अस्पताल नंबर एक पर है। अब तक जिले में सबसे ज्यादा डेंगू के 10 रोगी मिलने के बाद भी मलेरिया विभाग या नगर पालिका ने अब तक जिला अस्पताल परिसर में फॉगिंग कराने की जरूरत नहीं समझी है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो अब तक जिले में डेंगू के कुल 38 रोगी मिले हैं। यह वह रोगी हैं जिनको एलाइजा जांच के आधार पर डेंगू की पुष्टि की गई है। हालांकि, इससे कहीं ज्यादा डेंगू के रोगी निजी लैब की एनएस-वन रिपोर्ट में आ रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग सिर्फ एलाइजा टेस्ट की बात मानता है।
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सबसे ज्यादा मामले शहर में
स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग भले कोई भी दावा करे लेकिन डेंगू के कुल 38 मामलों में अब तब सबसे ज्यादा मामले शहर में हैं। डेंगू के लिहाज से शहर पहला रेड जोन बना है। मलेरिया विभाग के 39 टीमें भी काम कर रही हैं, लेकिन स्वाथ्य विभाग मलेरिया विभाग को तमाम जानकारियां ही नहीं देता। दरअसल, एलाइजा टेस्ट जिला अस्पताल में होते हैं और स्वास्थ्य विभाग सिर्फ एलाइजा टेस्ट को ही मानता है। इसके बावजूद जिला अस्पताल की ओर से एलाइजा जांच रिपोर्ट ही नहीं दी जाती।
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मलेरिया के 13 और फैल्सीपेरम के तीन रोगी मिले
बृहस्पतिवार को जिले में अलग-अलग स्थानों पर बुखार पीड़ितों की जांच के दौरान शाम चार बजे तक मलेरिया के 13 और फैल्सीपेरम के तीन नए रोगी मिले हैं। बृहस्पतिवार को जिले में मलेरिया विभाग की ओर से 32 गांवों के साथ शहर के मोहल्लों में भी डीडीटी छिड़काव कराया गया। अलग-अलग टीमों ने लार्वा नष्ट करने का काम भी किया है। जिला मलेरिया अधिकारी योगेश सारस्वत ने भी कई स्थानों पर निरीक्षण कर औपचारिकता निभाई। उनका कहना है कि बदायूं अब मलेरिया प्रभावित जिलों में नहीं है। पिछले वर्षों के मुकाबले इस वर्ष हालात काफी बेहतर हैं।
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रिसौली में घंटे भर कैंप लगाकर चली गई टीम
बिल्सी क्षेत्र का रिसौली गांव इन दिनों बुरी तरह से बीमारियों की जद में है। यहां कुछ लोगों को प्राइवेट लैब से डेंगू की पुष्टि हो चुकी है तो अधिकतर घरों में लोग बुखार से तप रहे हैं। यहां बुखार का प्रकोप बढ़ा और मामला चर्चा में आया तो बृहस्पतिवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची तो यहां मरीजों की जबरदस्त भीड़ लग गई। तब घंटे भर में ही टीम कैंप के नाम पर खानापूरी करके लौट आई।
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डहरपुर में फैला बुखार, निजी लैब में 10 लोगों को डेंगू की पुष्टि
मूसाझाग। डहरपुुुर गांव में बुखार का प्रकोप है। गौर करने वाली बात यह है कि यहां आठ लोगों में निजी लैब ने डेंगू की पुष्टि की है। इनमें कुछ लोगों को हालत गंभीर होने पर राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। गांव के लोग डेंगू को लेकर खौफजदा हैं, स्वास्थ्य विभाग सिर्फ एलाइजा जांच को मानता है, साथ ही विभाग एनएस-वन में डेंगू की पुष्टि वाले रोगियों की जांच भी नहीं कराता और इनको डेंगू का रोगी भी नहीं मानता है।
डहरपुर गांव में कई दिन से बुखार का प्रकोप है। यहां के ज्यादातर लोग निजी डॉक्टरों के यहां इलाज करा रहे हैं। इलाज से पहले निजी लैब में ही जांच भी करा रहे गांव के अनिल, ओमकार, अतुल, विनोद, विमला देवी, ऊषा देवी, माधवेंद्र सिंह, अंजलि चौहान, उमेश पाल सिंह चौहान, विकास, मुनीष, राहुल गुप्ता, उमर ,दिवाकर सिंह, श्रीपाल सिंह, मुनेंद्र, उमर, तेजपाल, प्रिंस को निजी लैब ने डेंगू की पुष्टि की है। यह लोग राजकीय मेडिकल कॉलेज में इलाज करा रहे हैं। गौर की बात यह है कि अब तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से गांव में कैंप नहीं लगाया गया है। संवाद
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पिछले वर्षों के मुकाबले इस वर्ष हालात काफी बेहतर हैं। डेंगू के कुल मामलों में इजाफा हुआ है, पूरी सावधानी बरती जा रही है। डेंगू का सीजन भी खत्म होने वाला है। लोगों को भी चाहिए कि वह सतर्कता से काम लें। समझदारी कें साथ मच्छरजनित बीमारियों से बचें।
- डॉ. विक्रम सिंह पुंडीर, सीएओ