साइबर ठग लोगों से ठगी करने के लिए तरीके इस्तेमाल कर रहे हैं। ये लोग कभी एसपी, दरोगा, इंस्पेक्टर तो कभी नॉरकोटिक्स का अधिकारी बनकर बात करते हैं। ऐसे में इन कॉलों से सतर्क रहने की आवश्यकता है। अक्सर घर के किसी व्यक्ति के पकड़े जाने की बात सुनकर परिजन सुधबुध खो बैठते हैं, जिसका फायदा फोन करने वाले ये ठग उठाते हैं।
बदायूं के साइबर थाना प्रभारी विनोद कुमार बर्धन कहते हैं कि सबसे पहले लोग जल्दबाजी न करें। पहले मामले की सच्चाई पता करें, फिर उसके बाद अगला कदम उठाएं। खासकर किसी इंस्पेक्टर, पुलिस अधिकारी या फिर नारकोटिक्स विभाग से कोई कॉल आए। कॉल आते ही उसकी बातों में न आएं। पहले सच्चाई पता करें। उसके बाद पुलिस को सूचना दें।
खुद को इंस्पेक्टर बताकर की कॉल
करीब एक माह पहले शहर के लोची नगला निवासी रामशरन गुप्ता के मोबाइल पर कॉल आई थी। कॉल करने वाले ने खुद को इंस्पेक्टर बताते हुए कहा था कि उनका बेटा जम्मू-कश्मीर में पढ़ता है। वह पढ़ाई के दौरान मादक पदार्थ की तस्करी करते पकड़ा गया है। उनका बेटा अभयराज वास्तव में जम्मू-कश्मीर में पढ़ाई कर रहा था। कॉल आने के दौरान वह अपनी कक्षा में था।
शुरुआत में रामशरन गुप्ता डर गए, लेकिन तब तक उनके भाई अवनीश गुप्ता ने अभयराज को कॉल लगा दी। उसने बताया कि वह अभी कक्षा में पढ़ाई कर रहा है। वह बाद में बात करेगा, लेकिन जब उन्होंने अभय को सच्चाई बताई तो उसने अपने अध्यापक से बात कराई। तब कहीं रामशरन गुप्ता ठगी का शिकार होते-होते बचे।