कथा वाचक आचार्य सोमदत्त महाराज।
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उघैती। क्षेत्र के गांव लोथर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में रविवार को कथा वाचक आचार्य सोमदत्त महाराज ने भक्त प्रह्लाद का प्रसंग सुनाया। बताया कि भक्त पर जब भी अत्याचार होते हैं तो भगवान स्वयं उसकी रक्षा करते हैं।
बताया कि भक्त प्रह्लाद को भगवान में अटूट आस्था थी। उनको अपने नास्तिक पिता हिरण्यकश्यप के विरोध का सामना करना पड़ता है। हिरण्यकश्यप अपने भाई की मौत का बदला भगवान विष्णु से लेना चाहता है और प्रह्लाद विष्णु का भक्त होता है। प्रह्लाद भगवान विष्णु को याद करता है। इस कारण हिरण्यकश्यप उससे क्रोधित रहता है। हिरण्यकश्यप के अत्याचार बढ़ जाते हैं। वह प्रह्लाद की हत्या करना चाहता है। भक्त प्रह्लाद को स्वयं भगवान विष्णु बचाने नरसिंह के रूप में आते हैं और हिरण्यकश्यप की का वध कर देते हैं। प्रसंग सुन श्रोता भाव विभोर हो गए। संवाद