मृतक के हाथ का पंजा मिला था
पुत्र का कहना था कि थाना कुंवरगांव के चौकीदार ने 25 नवंबर 2011 को मामला दर्ज कराया कि बल्लिया गांव के खेत में एक व्यक्ति का कटे हुए हाथ का पंजा मिला। उसे जानवर खींच कर ले जा रहे थे। शव के कटे हुए हाथ का पंजा सुरक्षित रखा गया था। जब पुलिस ने उसे हाथ का पंजा दिखाया तो उसने कलाई में बंधे कलावे और नाखून देखकर उसकी अपने पिता के हाथ के रूप में पहचान की।
सुनवाई के दौरान चौथे आरोपी की मौत हुई
उसके बाद अनिल ने रमेश, मां उर्मिला, दुलार और नरोत्तम पुत्र दुलार निवासी बल्लिया थाना कुंवरगांव के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने विवेचना के बाद रमेश, उर्मिला, नरोत्तम और दुलार के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। मुकदमे की सुनवाई के दौरान दुलार की मृत्यु हो गई।
फास्ट ट्रैक कोर्ट न्यायाधीश सारिका गोयल ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। कोर्ट ने अभियोजन की ओर से एडीजीसी ओमपाल कश्यप और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस सुनने के बाद रमेश, उर्मिला देवी और नरोत्तम को हरिशंकर की हत्या में मुजरिम करार दिया। कोर्ट ने तीनों मुजरिमों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।