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माफिया ने जाहिदपुर आलमपुर में बेचा था पोषाहार

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माफिया ने जाहिदपुर आलमपुर में बेचा था पोषाहार
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तहसील के अंदर तक जमी हैं जड़ें, एक बाबू के जरिए होती है डीलिंग
माफिया को बचाने की कोशिश, लीपापोती करके जांच रिपोर्ट डीएम को भेजी गई
अमर उजाला ब्यूरो
सहसवान (बदायूं)। सहसवान के जाहिदपुर आलमपुर गांव में पोषाहार एक माफिया ने बेचा था, जिसकी जड़ें तहसील के अंदर तक हैं। तहसील में महत्वपूर्ण सीट पर बैठे एक बाबू के जरिए माफिया की डीलिंग चलती है। तहसील प्रशासन पोषाहार बेचने के मामले में माफिया को बचाने की पूरी कोशिश में है। साठगांठ के चलते जांच के नाम पर लीपापोती कर रिपोर्ट डीएम को भेज दी गई है।
यह था मामला: शनिवार 15 दिसंबर को जाहिदपुर आलमपुर में 150 कट्टे पोषाहार बेचा गया था। ग्रामीणों ने पोषाहार चारे के साथ पशुओं को खिलाने के लिए खरीदा था। पोषाहार एक पिकअप में ले जाया गया था, जो सहसवान कस्बे की है। किसी व्यक्ति ने पोषाहार बेचे जाने की सूचना जिले के एक अधिकारी को दे दी। उन्होंने सहसवान एसडीएम संजय कुमार सिंह को बताया। एसडीएम ने नायब तहसीलदार राजकुमार को मौके भेजा। प्रत्यक्षदर्शी ग्रामीणों के मुताबिक छापा मारने के दौरान दो घरों से 150 कट्टे पोषाहार बरामद हुआ था। यह पोषाहार एक माफिया के माध्यम से बेचा गया था। माफिया की पत्नी आंगनबाड़ी वर्कर भी है। माफिया की तहसील में तैनात एक बाबू से साठगांठ है। उस बाबू ने माफिया की डीलिंग करा दी, जिससे जांच करने वाले ही माफिया को बचाने की कोशिश में जुट गए। रविवार को मामला चर्चा में आ गया। बावजूद इसके तहसील वाले मामले पर लीपापोती में जुटे रहे। खास बात यह है कि इतना बड़ा मामला होने के बावजूद सोमवार को पूरे दिन माफिया तहसील में जमा रहा।
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सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान पूछताछ करने पर पिकअप चालक ने पोषाहार बेचने वाले का नाम बताया था। पिकअप में कितने कट्टे थे इसकी जानकारी भी दी। बावजूद इसके जांच का बिंदु गांव जाहिदपुर आलमपुर का आंगनबाड़ी केंद्र रहा। जबकि पकड़ा गया पोषाहार बाहर से लाया गया था।
सूत्रों के मुताबिक जांच रिपोर्ट में दर्शाया गया है कि गांव के आंगनबाडी केंद्र पर नवंबर में बाल पोषाहार का वितरण ठीक से किया गया था, जो पोषाहार शेष बचा वह स्टाक में मौजूद है। गांव में बेचा गया बाल पोषाहार किस केंद्र का था इसकी जांच करने की जरूरत नहीं समझी गई। यानी माफिया को बचाने के लिए तहसील प्रशासन ने गोलमोल रिपोर्ट बनाकर डीएम को भेज दी।
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ऐसे होता है गोलमाल
गांव जाहिदपुर आलमपुर में पिकअप में भरकर 150 कट्टे बाल पोषाहार लाया गया था। जिसमें से 97 कट्टो को गांव में ही ग्रामीणों के हाथ बेच दिया गया और शेष बचे 53 कट्टों को गांव रेलई माधौपुर में जाकर बेचा गया। ग्रामीणों की माने तो यह पोषाहार हर माह गांव में बिक्री को आता है। पहले गांव के एक व्यक्ति के घर पर उतारा जाता है और फिर वहां से ग्रामीण जरूरत के हिसाब से खरीदकर अपने पशुओं के लिए ले जाते हैं। यह काम एक लंबे समय से चला आ रहा है। बताते यह भी हैं कि गोदाम से पोषाहार उठान के समय आंगनबाड़ी वर्कर्स से धन उगाही की जाती है। जो पोषाहार माफिया के माध्यम से प्रशासन के अधिकारियों तक पहुंचाती हैं। जिस कारण प्रशासन के अधिकारी सब कुछ जानते हुए मौन धारण किए रहते हैं।
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पहले सपा, अब भाजपा में बनाई माफिया ने पैठ
पोषाहार बेचने वाले माफिया की पहुंच अफसरों के साथ नेताओं में भी है। समाजवादी पार्टी के शासनकाल में माफिया की सपा नेताओं से खासी पहुंच थी। प्रदेश में सरकार बदलने के बाद माफिया ने भाजपा नेताओं से नजदीकी बढ़ा ली। इससे पहले भी ग्रामीणों की सूचना पर कई बार पोषाहार बेचते हुए पकड़ा गया था, लेकिन पोषाहार माफिया पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। लगभग तीन वर्ष पूर्व 8 लाख 86 हजार रुपये का हाटकुक घोटाला हुआ था। तब भी अपनी पहुंच के चलते माफिया, एक सुपरवाइजर और बाबू को जेल जाना पड़ा था।
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आंगनबाड़ी केंद्र तक ऐसे पहुंचता है पोषाहार
नियमानुसार आंगनबाड़ी केंद्र तक पोषाहार पहुंचाने की जिम्मेदारी ठेकेदार की है। मगर ठेकेदार पोषाहार गोदाम पर उतार देता है। गोदाम से पोषाहार आंगनबाड़ी वर्कर निजी या किराए के वाहन में केंद्र तक ले जाती हैं।
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डीएम ने पूछा तो एसडीएम ने यह कहा
डीएम दिनेश कुमार सिंह ने जाहिदपुर आलमपुर गांव में पोषाहार पकड़े जाने के मामले में फोन पर एसडीएम सहसवान ने पूछताछ की। एसडीएम ने डीएम को बताया गया कि पोषाहार 14 दिसंबर को पहुंचा था और शिकायत 15 तारीख को मिली। इस पर डीएम ने मौके पर की गई वीडियोग्राफी भेजने को एसडीएम से कहा। यहां बता दें कि इस मामले में ग्रामीणों का कहना है कि पोषाहार 15 दिसंबर को पकड़ा गया था।
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नायब तहसीलदार और सीडीपीओ की जांच मिल गई है। जांच में ऐसा कुछ नहीं हैं। जांच रिपोर्ट डीएम को भेज दी गई है।
-संजय कुमार सिंह, एसडीएम सहसवान
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