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एआरटीओ के बाबू ने बाइक मालिक को धमकाया, मामला रफादफा करो

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बदायूं। मृतक युवक को जीवित दिखाकर बाइक ट्रांसफर कराने के मामले में अब बाइक ट्रांसफर कराने वाले के पिता ने एसएसपी से शिकायत की है कि बाबू ने दलाल के साथ घर में घुसकर धमकाया, साथ ही मामला रफा-दफा करने के लिए कहा।
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सोमवार को कबूलपुरा के जहीर अहमद ने एसएसपी को पत्र देकर बताया कि उनके बेटे वशीर की मृत्यु 2021 में हो गई थी। उसके नाम की बाइक ट्रांसफर कराने को जानकारी लेने उनका दूसरा बेटा नजीर एआरटीओ कार्यालय गया। वहां उसकी मुलाकात बाबू मनोज कुुमार गौतम से हुई। बाबू ने एक प्राइवेट व्यक्ति का नंबर दिया। कहा कि इस पर बात कर लो, वह सब काम करा देगा। इसके बाद उसने कॉल करके उस व्यक्ति को कार्यालय बुला भी लिया। उस व्यक्ति 15 हजार रुपये लेकर कहा कि 33 मार्च 2022 को आ जाना, तुम्हारा सब काम हो जाएगा। इसके बाद वशीर और नजीर के फोटो भी मांगे। वह 23 को कार्यालय गया तो उनकी बाइक ट्रांसफर हो चुकी थी। जब अमर उजाला में फर्जीबाड़ा छपा तो उन्हें पूरे मामले की जानकारी हुई। 30 अप्रैल को बाबू एक दलाल को लेकर उनके घर आया। जहीर अहमद ने आरोप लगाया कि उसने धमकी देकर कहा कि वह लिखकर दे दें कि कागजात एक वकील ने तैयार कराए थे। उन्होंने मना किया तो उन्हें व बेटे को जान से मारने और झूठे फंसाने की धमकी दी और चला गया।
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कबूलपुरा निवासी व्यक्ति ने एआरटीओ दफ्तर के बाबू के खिलाफ तहरीर दी है। आरोपों की जांच कराई जा रही है, सत्यता मिली तो बाबू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।
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- प्रवीन सिंह चौहान, एसपी सिटी
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बाबूजी छुट्टी लेकर निकला, एआरटीओ भी हैं परेशान
बदायूं। कबूलपुरा के मृतक को कार्यालय में उपस्थित दिखाकर बाइक ट्रांसफर कराने में सहायक परिवहन आयुक्त कार्यालय से हो रही जांच के बाद बाबू छुट्टी लेकर घर चला गया है तो एआरटीओ प्रशासन खुद भी परेशान हैं।
यहां बता दें कि कुछ दिन पहले बाबू मनोज कुमार गौतम ने कबूलपुरा के मृतक को जीवित व कार्यालय में उपस्थित बताकर उसकी बाइक उसके भाई के नाम ट्रांसफर कर दी थी। फाइल पर एआरटीओ आरबी गुप्ता ने भी हस्ताक्षर करके मोहर लगा दी थी। बाइक ट्रांसफर होने के बाद फर्जीबाड़े की पोल खुल गई। तब से एआरटीओ कार्यालय में खलबली मची है। एआरटीओ और बाबू दोनों ही आरटीओ बरेली के सामने तलब हो चुके हैं। इसकी शासन को रिपोर्ट जा चुकी है और सहायक परिवहन आयुक्त स्तर पर जांच लंबित है। कार्रवाई होना शेष है।
इधर, बाबू ने एक और फर्जीबाड़ा कर दिया। उसने एआरटीओ के पद्नाम से ही बाइक ट्रांसफर कराने वाले के खिलाफ तहरीर दे दी। जब एआरटीओ को पता चला तो उन्होंने उसे बाबू से फिर स्पष्टीकरण मांगा।
इधर बाबू छुट्टी लेकर घर चला गया है तो एआरटीओ प्रशासन आरबी गुप्ता भी बाबुओं की हरकत से बढ़ी जवाबदेही से परेशान हैं। चर्चा है कि वह एक जनप्रतिनिधि के संपर्क में हैं और दूसरे जिले में ट्रांसफर चाहते हैं। उन्होंने पत्रकारों के सामने यह स्वीकार किया कि बाबुओं की कारगुजारियों से आहत हैं। दूसरों की गलती में खुद कार्रवाई का शिकार नहीं होना चाहते। इस बारे में उच्चाधिकारियों से मिलकर अपनी स्थिति भी स्पष्ट की है।
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बाबू से तीन बार मांग चुके स्पष्टीकरण, नहीं आया जवाब
एआरटीओ प्रशासन आरबी गुप्ता ने बताया कि संबंधित बाबू मनोज कुमार गौतम से अलग-अलग मामलों में स्पष्टीकरण मांग चुके हैं उसने किसी का भी जवाब नहीं दिया है। अब वह स्वयं कार्रवाई करेंगे।
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एआरटीओ कार्यालय के पास दुकान पर होती है दलाली
जहां एआरटीओ कार्यालय के अंदर भ्रष्टाचार फैला पड़ा है वहीं कार्यालय के पास दलालों की दुकानें सजी हैं। यहां कई चाय की दुकानें हैं। इनमें से एक पूरे दिन दलालों की गतिविधियों का केंद्र बनी रहती है। दलाल यहां वाहन मालिकों का काम कराने की फीस लेते हैं और कुछ हिस्सा बाबुओं को देते हैं। ये सिलसिला बरसों पुराना है।
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