बदायूं। पुलिस के बारे में पुरानी कहावत है कि वह चाहे तो रस्सी का सांप भी बना सकती है। काले को गोरा और गोरे को काला कर सकती है। कुंवरगांव क्षेत्र से अपहृत बालक आयुष के मामले में ऐसा ही किया गया। बालक को तलाश न करना पड़े और जवाबदेही न हो, इसके लिए कुंवरगांव पुलिस ने हाथरस में लावारिस मिले बच्चे को कुंवरगांव से अगवा बालक आयुष साबित करने की पूरी कोशिश पर वह अपने इरादों में कामयाब नहीं हो सकी।
तीन अक्तूबर की रात छह माह के आयुष का कुंवरगांव थाना क्षेत्र के गांव कल्लिया काजमपुर से अपहरण कर लिया गया था। उस रात आयुष अपनी मां कन्यावती के साथ सोया हुआ था। रात 12 बजे पता चला कि बच्चा लापता है। पुलिस को सूचना दी गई। शुरुआती दौर में पुलिस पर कार्रवाई का दबाव रहा। इसी के चलते कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पुलिस रोज अधिकारियों को बताती थी कि कहां तक कार्रवाई पहुंची ?
पुलिस ने खेल तब शुरू किया जब 10 अक्तूबर को हाथरस जिले में एक लावारिस बालक मिला। पुलिस ने उसे आयुष बताया। परिवारवालों ने उसे पहली नजर में ही आयुष मानने से इनकार कर दिया। क्योंकि वह बालक गोरा था और आयुष के शरीर से काफी अलग था। उसके चेहरे की बनावट भी आयुष से अलग थी। इसके बावजूद थाना पुलिस ने उस बालक का और आयुष के माता-पिता का डीएनए सैंपल कराया। आयुष के माता-पिता बेहद गरीब हैं और ज्यादा पढ़े लिखे भी नहीं है। थाना पुलिस इसी का फायदा उठाती रही और तलाश भूलकर डीएनए रिपोर्ट का इंतजार करती रही। अपनी जवाबदेही से बचने के लिए परिवार वालों का भी इस्तेमाल किया। खैर जो सच्चाई थी, वह डीएनए रिपोर्ट के रूप में आ गई। वह बालक आयुष नहीं निकला।
-
पैरवी तक नहीं कर पा रहे माता-पिता
छह माह के आयुष के माता-पिता इतने सीधे हैं कि वह मामले में पैरवी तक नहीं कर पा रहे हैं। जब पुलिस को उनकी जरूरत पड़ी, तब उन्हें बुला लिया गया लेकिन वह पैरवी को लेकर थाने नहीं पहुंचे। वह पुलिस पर ही भरोसा करते रहे। परिवार के मुताबिक बच्चे के गम में मां कन्यावती को शारीरिक मानसिक आघात पहुंचा।
-
हाथरस में मिले बालक और आयुष के माता-पिता का डीएनए सैंपल मिलान नहीं हुआ है। अगर परिवार वाले दोबारा सैंपल कराना चाहे तो करा सकते हैं। पुलिस मामले में स्वयं लगी है। जो बालक लापता हुआ है उसे भी तलाश कराया जा रहा है।
- प्रवीन सिंह चौहान, एसपी सिटी
हाथरस में मिला लावारिस बालक। संवाद- फोटो : BADAUN