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नाबालिग से दुराचार पर 20 साल की सजा

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बदायूं। पांच साल पुराने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में पॉक्सो एक्ट कोर्ट के स्पेशल जज सुबोध वार्ष्णेय ने नामजद आरोपी को मुजरिम ठहराया है। कोर्ट नें मुजरिम को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 30 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
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जरीफनगर थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने छह अक्तूबर 2016 को थाने में तहरीर दी थी। व्यक्ति के मुताबिक उसकी नाबालिग बेटी अपनी मां के साथ खेत से चारा लेकर घर लौट रही थी। इसी दौरान रास्ते में भानुप्रताप, पानसिंह, मुरारीलाल और हेमेंद्र बोलेरो गाड़ी से मिले और उसकी नाबालिग बेटी को जबरन गाड़ी में डालकर ले गए। पुलिस ने आठ अक्तूबर 2016 को सभी आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की। 15 अक्तूबर को आरोपी भानु प्रताप गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। पुलिस ने विवेचना कर भानु प्रताप के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। अन्य नामजद आरोपियों की कॉल डिटेल के आधार पर नामजदगी झूठी बताई गई।
स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट सुबोध वार्ष्णेय ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। कोर्ट ने अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक सीपी सिंह और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस को सुना। कोर्ट ने आरोपी भानु प्रताप को नाबालिग किशोरी के अपहरण कर दुष्कर्म करने के मामले में दोषी करार देते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने मुजरिम भानु प्रताप पर 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की धनराशि जमा होने पर संपूर्ण धनराशि पीड़िता को बतौर मुआवजा देने का भी कोर्ट ने आदेश दिया है। संवाद
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