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पुलिस की पाठशाला : पहले आत्मनिर्भर बनें बेटियां, फिर करें जीवन के दूसरे फैसले

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पुलिस की पाठशाला में प्रतिभाग करतीं छात्राएं। संवाद - फोटो : BADAUN
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बदायूं। राजकीय महिला महाविद्यालय में मंगलवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिले के नवागत एसएसपी डॉ. ओपी सिंह ने यहां बेटियों को आत्मनिर्भर व स्वाभिमानी बनने का संदेश दिया।
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कार्यक्रम में पहुंचने पर कॉलेज की प्राचार्य डॉ. स्मिता जैन ने एसएसपी डॉ. ओपी सिंह का स्वागत किया। कार्यक्रम प्रभारी डॉ. वंदना मिश्रा ने एसएसपी को संबोधन के लिए आमंत्रित किया। एसएसपी ने बेटियों को पहला संदेश आत्मनिर्भर बनने का दिया। कहा कि पहला काम पढ़ाई करके अपना कॅरियर बनाने का है। परिवारवालों से इस बारे में स्पष्ट बात कर लें कि शादी व जीवन के अन्य फैसले वे इसके बाद ही लेंगी। बताया कि महिला उत्पीड़न के अधिकतर मामले ऐसी ही महिलाओं के आते हैं जो कम शिक्षित या दूसरों पर निर्भर होती हैं। उन्होंने बेटियों को सुरक्षा व साइबर क्राइम से जुड़े टिप्स भी दिए। सीओ सिटी चंद्रपाल सिंह व कोतवाल देवेंद्र पाल धामा भी यहां मौजूद रहे।
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निराला की कविता से अभिभावकों को दिया संदेश
एसएसपी बेटियों से संवाद करते वक्त भावुक हो गए। कहा कि अमर उजाला के माध्यम से अभिभावकों को भी संदेश देना चाहते हैं कि वे भी बेटियों पर भरोसा रखें। वह कई मायनों में बेटों से आगे जाएंगी। उन्होंने महाकवि निराला की सरोज स्मृति कविता का अंश भी सुनाया जिसमें अभावग्रस्त निराला बेटी की असमय मृत्यु पर शोक जताते हैं। कहा कि अभिभावकों ने बेटी और बेटों में भेद किया तो उन्हें भी पछताना पड़ेगा।
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..तो ‘डीआईजी’ बन जाएंगी बेटियां
एसएसपी ने कहा कि बेटियां पढ़लिखकर कमाई करेंगी तो पति पर आश्रित नहीं रहेंगी। पति अच्छे हुए तो भी बेटियां ‘डीआईजी’ बन जाएंगी। फिर कहा कि इस शब्द से आशय है डबल इनकम ग्रुप। मतलब पति के साथ दोहरी कमाई का रास्ता बनेगा तो परिवार समृद्ध होगा।
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एसएसपी ने बेटियों को दी ये सीख
- सोशल मीडिया आभासी दुनिया है। यहां हर शख्स अपना अच्छा चेहरा पेश करता है। इसलिए अनजान लोगों से दोस्ती से बचें वर्ना बड़े खतरे में पड़ सकती हैं। भावनाओं में कतई न बहें।
- प्रेमविवाह गलत नहीं है पर जल्दबाजी का निर्णय नुकसान कर सकता है। अगर परिवार अरेंज मैरिज भी कराना चाहता है तो भी बेटियों को यह जानने का अधिकार है कि जीवनसाथी उनके लायक है या नहीं।
- मनुष्य में बुद्धि है तभी वह श्रेष्ठ है, पशुओं में उनसे ज्यादा शक्ति होती है। इसलिए हर फैसला सोच समझकर लें।
- महापुरुषों की जीवनी व संघर्ष गाथा पढ़ें, देखें कि उन्होंने कैसे अपना व्यक्तित्व बनाया।
- यातायात नियम न तोड़ें, दूसरों को भी यह बताएं। पुलिस जुर्माना इसलिए लगाती है ताकि लोग भविष्य में सुधार करें।
- पुलिस केवल डराने धमकाने को नहीं है। वह अच्छी भी होती है। यह भरोसा रखें और किसी भी संकट में 112 डायल कर दें। आप रात में कहीं भटक जाएं तो भी बताएं, 112 की गाड़ी आपको घर पर छोड़ेगी।
- थानों में जाने से हिचकें नहीं। बाहरी हिस्से में महिला हेल्प डेस्क है। वहां महिला पुलिसकर्मी ही आपसे बात करके समस्या सुलझाएंगी।
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बेटियों ने कहा
महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से पुलिस बहुत अच्छा काम कर रही है। कई हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए है। अगर किसी को परेशानी है या दिक्कत है तो वह हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके पुलिस की मदद मांग सकता है।
- आलिया, बीए प्रथम वर्ष
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शहर में रहने वाली महिलाओं और छात्राओं को हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी है लेकिन ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं इससे अनभिज्ञ हैं। उन्हें जागरूक करने के लिए कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए। कम से कम वह भी इनके महत्व को समझ सकें।
- अरीवा, बीए प्रथम वर्ष
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अपनी पढ़ाई के साथ-साथ हमें अपने समाज को जागरूक भी करना चाहिए। जो लोग नहीं जानते हैं, उन्हें भी सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का काम करना चाहिए। मैं इस मिशन को आगे बढ़ाऊंगी।
- लाएवा, बीए प्रथम वर्ष
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एसएसपी सर ने जो समझाया, हमे अच्छी तरह समझ आ गया। पुलिस को लेकर छात्र-छात्राओं के मन में जो छवि बनी थी, काफी हद तक वह भी बदली है। बुराइयां खत्म करने को हम सबको पुलिस का सहयोग करना चाहिए।
- शहजी खान, बीए प्रथम वर्ष
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बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने की बात मन को छू गई। यह सही बात है कि हम पढ़ लिखकर जब अपने पैरों पर खड़े हो जाएंगे तो भविष्य में किसी परेशानी के वक्त परिवार पर बोझ नहीं बनेंगे।
- मोहिनी सक्सेना, बीए द्वितीय वर्ष
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- सोशल मीडिया पर ज्ञान बांचने वाले हकीकत में कुछ और भी हो सकते हैं। आज यह बात भी अच्छी तरह समझी कि आभासी दुनिया और वास्तविकता में बहुत अंतर हो सकता है। सभी लड़कियों को इस पर गौर करना चाहिए।
- नूर फातिमा, बीए प्रथम वर्ष

राजकीय महिला महाविद्यालय में आयोजित पुलिस की पाठशाला में विचार रखते एसएसपी डॉ. ओपी सिंह। संवाद- फोटो : BADAUN

 

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