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अधूरे संसाधनों और सियासी टकराव के चलते स्वच्छता सर्वेक्षण में पिछड़ा शहर

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बदायूं। स्वच्छता सर्वेक्षण में मानकों की कसौटी पर बदायूं कमजोर होता जा रहा है तो इसकी कई वजह हैं। नगर विकास राज्यमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र की नगर पालिका संसाधनों की कमी से जूझ रही है तो सुधार की दृढ़ इच्छाशक्ति का अभाव भी दिखाई दे रहा है। सियासी टकराव भी शहर को गंदा बनाने की एक वजह माना जा रहा है।
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शासन की तरफ से शनिवार को स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत सभी जिलों की नगर पालिका और नगर पंचायतों की रैकिंग जारी की गई। इसके तहत शहर नगर पालिका को पिछले साल 223वें नंबर पर संतोष करना पड़ा था, लेकिन इस बार आंकड़ा छह अंक फिसलकर 229 नंबर पर पहुंच गया। दरअसल स्वच्छता सर्वेक्षण में जिन चार मानकों पर नगर पालिका व पंचायतों की स्थिति का आंकलन किया जाता है, उनमें डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन, कूड़ा उठाने वाले वाहनों में जीपीएस, ओडीएफ प्लस व वाटर प्लस जैसे बिंदु शामिल हैं। नगर विकास राज्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र वाली नगर पालिका में मानकों को पूरा करने वाले संसाधन नहीं हैं। ऐसे में महत्वपूर्ण बिंदु नागरिकों की राय भी पालिका के बारे में खराब ही आती है। प्रमुख बिंदुओं पर शहर की स्थिति कुछ इस तरह है।
शहर नगर पालिका की ओर से पिछले साल डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए एक फर्म को नामित किया गया था। फर्म ने सभी वार्डों में जाकर कूड़ा लेना शुरू किया था। फर्म द्वारा हर घर से प्रतिमाह 50 रुपये और दुकान से 100 रुपये लिए जाते थे। कर्मचारियों ने फर्म पर मानदेय न देने का आरोप लगाकर ईओ से लेकर डीएम तक को ज्ञापन सौंपा था। कर्मचारियों ने प्रदर्शन भी किया पर उन्हें मानदेय नहीं मिला, जिससे उन्होंने डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन को बंद कर दिया ।
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इधर, शेखूपुर रोड पर नगर पालिका प्रशासन की ओर से एमआरएफ सेंटर (कूड़ा निस्तारण केंद्र) का निर्माण कराया गया था। इसका उद्घाटन नगर विकास राज्यमंत्री और तत्कालीन डीएम ने किया। बावजूद इसके अभी तक एमआरएफ सेंटर शुरू नहीं हो सका है। इसकी वजह से कूड़ा का उचित निस्तारण नहीं हो पा रहा है।
स्वच्छता सर्वेक्षण सर्वे के दौरान कूड़ा उठाने वाले वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगा है या नहीं इसके भी नंबर दिए जाते हैं। इस मामले में नगर पालिका पूरी तरह पास बताई जा रही है। करीब डेढ़ साल पहले ही नगर पालिका ने कूड़ा निस्तारण वाले वाहनों में जीपीएस लगवाया था। हालांकि नगर पालिका में इन वाहनों का लेखा-जोखा रोज चेक नहीं हो रहा है।
पालिका ओडीएफ प्लस तो निकली, लेकिन डबल प्लस में गच्चा खाया
शहर नगर पालिका को शासन की तरफ से शौचालय बनाने का जो लक्ष्य मिला था, उसके अनुरूप नगर पालिका क्षेत्र में शौचालय बन चुके हैं। ऐसे में नगर पालिका को काफी पहले ओडीएफ प्लस घोषित किया जा चुका है। मगर बदायूं नगर पालिका अभी ओडीएफ डबल प्लस में शामिल नहीं हो सकी है। डबल प्लस में यहां फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) होना चाहिए। इसको लेकर जल निगम की ओर से बाईपास के करीब एफएसटीपी का निर्माण कराया जा रहा है। यह अप्रैल तक बनना था, लेकिन अभी तक पूरा नहीं हो सका।
गंदे पानी के निस्तारण में भी चूके
स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत वाटर प्लस का भी बिंदु शामिल है। इसके तहत नालों से निकलने वाले गंदे पानी का निस्तारण करने की योजना शुरू की गई। शहर नगर पालिका में अभी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) एसटीपी प्लांट भी नहीं लगा है। ऐसे में यहां पर पानी की रिसाइकलिंग नहीं हो पा रही है। इस बिंदु पर भी पालिका फेल साबित हुई है।
शहर की आबादी के हिसाब से पर्याप्त सफाई कर्मी नहीं हैं। इसकी वजह से शहर में सफाई व्यवस्था प्रभावित होती है। आधुनिक मशीनों की भी जरूरत है, जिनसे शहर के नालों की बेहतर तरीके से सफाई हो सके। सबसे बड़ी दिक्कत यहां पर ईओ की रही है। यहां पर लगातार ईओ का चार्ज बदलता रहा है, जिससे कोई बड़ी योजना परवान नहीं चढ़ सकी। अब सिटी मजिस्ट्रेट के पास चार्ज आने से जल्दी ही चीजों में सुधार नजर आएगा। पालिकाध्यक्ष के मुताबिक मशीन खरीदने के लिए कुछ दिनों पहले ही बजट मिला है। उसी के अनुरूप अब जरूरी चीजों की खरीदारी की जाएगी ताकि यहां पर व्यवस्थाएं बेहतर हों। अगली साल बदायूं रैकिंग में काफी अच्छे नंबर लाएगा। - दीपमाला गोयल, नगर पालिका अध्यक्ष
दीपावली के बाद मुझे ईओ का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। उसके बाद में सफाई व्यवस्था पर पूरा ध्यान दिया गया है। शहर में सफाई दिखाई दे रही है। कोशिश रहेगी कि शहर को और बेहतर बनाया जा सके। - अमित कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट
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