बदायूं। बुराई पर अच्छाई की जीत के पर्व दशहरा पर हर साल बुराई के प्रतीक रावण का पुतला दहन किया जाता है लेकिन शहर में दुश्वारियों के दशानन की ओर जिम्मेदारों का ध्यान कभी नहीं जाता, ऐसे में जरूरत है कि इस दशानन का भी संहार हो, जिससे लोगों को हो रही दिक्कतों का निदान हो सके।
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सॉलिड वेस्ट प्लांट बने तो बात बने
कूड़ा निस्तारण के लिए नगर पंचायत गुलड़िया के पास गांव उतरना में करोड़ों रुपये की लागत से पीपीपी मॉडल पर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाया गया था, प्लांट दिसंबर 2012 तक शुरू होना था जो अब तक शुरू नहीं हो सका। करोड़ों की मशीनरी यहां जंक खा रही हैं। नगर विकास राज्यमंत्री ने भी दिलचस्पी नहीं ली। जरूरत है कि जल्द ही प्लांट शुरू हो।
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सीवर लाइन बने तो चोक नालों से न हो जलभराव
नगर पालिका के अधीन 10 बड़े और 70 छोटे नाले हैं। इसके अलावा कई नई कॉलोनियां भी बस गई हैं। इनमें ज्यादातर नगर पालिका की सीमा में नहीं हैं। लगभग सभी नाले चोक रहते हैं। ऐसे में मामूली बारिश में ही शहर जलमग्न हो जाता है। हालांकि, नगर विकास राज्यमंत्री का कहना है कि सीवर लाइन के लिए वह प्रयासरत हैं।
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सरकारी दावे तमाम पर टूटी सड़कों पर चलना मजबूरी
ज्यादातर सड़कों में सिर्फ गड्ढे नजर आते हैं। बिना बारिश ही इन गड्ढों में जलभराव रहता है। कई स्थानों पर तो दो-दो फुट गहरे गड्ढे हो गए हैं। और तो और पॉश इलाकों में भी सड़कें दुर्दशा का शिकार हैं। टूटी सड़कों पर जलभराव मुसीबतों को ज्यादा बढ़ा देता है। जरूरी है कि जिम्मेदार इस और ध्यान दें।
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डीजल पंप शिफ्ट हो तो दूर हो रोडवेज बस स्टैंड की दुश्वारी
रोडवेज बस स्टैंड पर डीजल पंप भी एक बड़ी समस्या है। दरअसल, रोडवेज का डीजल पंप दातागंज क्रॉसिंग स्थित नए वर्कशॉप में अब तक शिफ्ट नहीं हो सका है। ऐसे में रोडवेज की 131 बसों को डीजल लेने शहर के बीच पुराने स्टैंड पर ही आना हाता है। यहां निजी बस स्टैंड भी है। ऐसे में यहां पूरा दिन जाम लगता है। इस समस्या के जल्द ही निदान कराने की जरूरत है।
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विशेषज्ञों का अकाल, झोलछाप ले रहे जान
स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। गांव-देहात के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर और दवाएं न होने से रोगियों को या तो झोलाछाप की शरण में जाना पड़ता है या फिर जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है। जिला अस्पताल में भी करीब दो दशक से हृदय रोग समेत अन्य विशेषज्ञों का अकाल है। कई बार उनकी जान भी चली जाती है। जरूरी है कि जिम्मेदार इस समस्या के निदान में रुचि लें।
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अनियोजित संचालन से लगता है जाम
- ई-रिक्शा और टेंपो की बड़ी समस्या बनी हुई है। गौर करने वाली बात यह है कि ई-रिक्शा और टेंपो के रूट निर्धारित न होने से इनका संचालन मनमाने ढंग से होता है जो शहर में जाम का बड़ा कारण है। पार्किंग का भी कोई स्थान नहीं है। अनियंत्रित यातायात को नियंत्रित करने को शहर में सिग्नल तो लगाए गए, लेकिन यह किसी काम नहीं आए। इस ओर भी ध्यान दिए जाने की जरूरत है।
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ट्रेनें गिनती कीं, प्लेटफार्म नंबर दो भी बदहाल
रेलवे स्टेशन का प्लेटफार्म नंबर दो लंबे समय से बदहाली का शिकार है। दरअसल, बरेली-कासगंज रेल रूट पर ब्रॉडगेज ट्रेनों का संचालन तो शुरू हो गया है लेकिन प्लेटफार्म नंबर दो मानक के अनुसार नहीं है। प्लेटफार्म नीचा होने से बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को ट्रेन में चढ़ने पर काफी परेशानी होती है। प्लेटफार्म के विस्तारीकरण का प्रस्ताव लटका हुआ है। पहले के मुकाबले ट्रेनों की संख्या भी कम है। समस्या निदान की जरूरत है।
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अधूरे निर्माण बन रहे बवालेजान
पनबड़िया के पास नाले की पुलिया का निर्माण करीब डेढ़ साल बाद भी पूरा नहीं हो सका है। इस कारण शहर में कश्मीरी चौक और गद्दी चौक पर जाम लगता है। दरअसल, शहर में लावेला चौक से नई सराय की ओर जाने वाले दो रोड हैं। एक रोड कश्मीरी चौक और एक गांधी पार्क शिव मंदिर, पनबड़िया, सुभाष चौक होते हुए जाता है। पनबड़िया की पुलिया टूटी से पूरा ट्रैफिक एक ही रोड पर है। कई और स्थानों पर निर्माण अधूरा पड़ा है। जल्द ही निर्माण पूरा कराए जाने की जरूरत है।
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अंडरग्राउंड बिजली लाइन घोटाले की इबारत
अंडरग्राउंड बिजली लाइन शहर की बड़ी समस्या है। मेंटीनेंस सही ढंग से न होने से हर वर्ष बारिश के दिनों में यह हादसों का सबब बनती है। इस वर्ष भी अंडरग्राउंड लाइन ने एक गणित शिक्षक, दरोगा के दिव्यांग बेटे की जान ले ली। इतना ही नहीं केबल बॉक्स की चपेट में आने से कई बेजुबान पशुओं की भी जान जा चुकी है। जरूरी है समस्या निदान के लिए जिम्मेदार आगे आएं।
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एक पार्किंग स्टैंड बनाया, वह भी कारगर नहीं
- शहर में नगर पालिका का एक भी पार्किंग स्थल नहीं है। सड़कों के दोनों ओर बेतरतीब खड़े होने वाले वाहनों के कारण सड़क संकरी हो जाती है। ऐसे में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। एसके इंटर कॉलेज के पास एक पार्किंग स्थल बनाया गया है, लेकिन यहां वाहनों को पार्क नहीं किया जा रहा। इसका खामियाजा जाम के रूप में भुगतना पड़ता है। जरूरी है समस्या का जल्द निदान हो।