फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उफ ! यह गंदगी, ऐसे में बीमारियां तो फैलेंगी

विज्ञापन
जगत ब्लॉक के दारानगर में भरा पानी। संवाद - फोटो : BADAUN
विज्ञापन
बदायूं। गंदगी और जलभराव संक्रामक व मच्छरजनित बीमारियों को बढ़ावा दे रहा है। विशेष सफाई अभियान के बावजूद शहर से लेकर गांव-देहात तक सफाई कर्मचारी पहुंच ही नहीं रहे। ऐसे में मलेरिया और स्वास्थ्य विभाग के साथ पंचायती राज विभाग की लापरवाही के कारण मलेरिया के रोगियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
विज्ञापन

मच्छरजनित बीमारियों के लिहाज से बदायूं के सालारपुर, जगत, समरेर और दातागंज ब्लॉक हाईरिस्क श्रेणी में हैं। इस वर्ष भी अब तक जिले में मलेरिया के 942 और फैल्सीपेरम के 65 मामले सामने आ चुके हैं। जिले में मलेरिया के 251 और फैल्सीपेमर के 10 सक्रिय रोगी हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में अब तक बुखार से किसी की मौत नहीं हुई है। दूसरी ओर बुखार से उसावां और जगत में तीन मौतें हो चुकी हैं।
मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए ही शासन ने विशेष सफाई अभियान का निर्देश दिया है। इसके बावजूद शहर से लेकर गांव-देहात तक तस्वीर बेहद चौंकाने वाली है। जगह-जगह जलभराव और गंदगी के कारण ही मच्छरजनित बीमारियां फैल रही हैं। मलेरिया और स्वास्थ्य विभाग औपचारिकताओं के नाम पर हेल्थ कैंप लगा रहा है।
विज्ञापन

जिले के 250 से ज्यादा गांव वायरल फीवर की चपेट में हैं। इसके बावजूद अगर स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग की ओर से लगाए जाने वाले कैंप की बात करें तो रोज अधिकतम 25 स्थानों पर ही कैंप लगाए जा रहे हैं। सोमवार को तो जिले में सिर्फ 403 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई। कुंवरगांव देहात के नंदगांव में वायरल का प्रकोप होने के बावजूद यहां सोमवार को भी कोई कैंप नहीं लगाया गया। नंदगांव ब्लॉक सालारपुर के तहत आता है और इसी ब्लॉक में इस वर्ष फैल्सीपेरम के सबसे ज्यादा रोगी मिले हैं।
स्वास्थ्य और पंचायतीराज विभाग के बीच नहीं बन रहा समन्वय
गांवों में सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी पंचायतीराज विभाग की है। विभाग के पास सफाई कर्मचारियों की लंबी-चौड़ी फौज है, लेकिन यह गांवों में सफाई करने नहीं पहुंच रहे। काफी संख्या में ऐसे सफाई कर्मचारी हैं जिन्होंने जुगाड़ से खुद को अधिकारियों के आवास या फिर विभिन्न सरकारी कार्यालयों में अटैच करा रखा है। स्वास्थ्य और पंचायती राजविभाग के बीच गांवों में स्वच्छता अभियान को लेकर समन्वय नहीं बन पा रहा। स्वास्थ्य विभाग के साथ मलेरिया विभाग भी पंचायती राज विभाग को साफ-सफाई और संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए बजट देता है, लेकिन इसके मुताबिक काम नहीं हो पाते। इसके साथ ही नगरीय निकायों की बात करें तो यहां भी इसी तरह से चल रहा है। नियमित सफाई कर्मचारी मोटा वेतन लेकर मजदूरी पर सफाई करा रहे हैं। इसका खामियाजा लोगों को संक्रामक बीमारियों के रूप से भुगतना हो रहा है।
अफसर भी नहीं दे रहे गांवों की दुर्दशा पर ध्यान
अलापुर। ब्लॉक जगत के गांव दारानगर की दुर्दशा पर भी अधिकारियों का ध्यान नहीं जाता। इस गांव की आबादी तीन हजार से ज्यादा है। गांव की सड़कों पर तालाब जैसे हालात हैं। लंबे समय से यहां पानी की निकासी और सड़कों की मरम्मत का काम नहीं हुआ। सड़कों पर भरा पानी और जगह-जगह लगे गंदगी के ढेर संक्रामक बीमारियों को दावत दे रहे हैं। जगत ब्लॉक भी मलेरिया के लिहाज से हाईरिस्क श्रेणी में शामिल है। जगह-जगह मच्छरों की नर्सरी पनप रही है। ग्राम प्रधान लटूरी लाल का कहना है कि वह जल्द गांव में इन हालात को दूर करने के लिए काम कराएंगे।
स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग मच्छरजनित बीमारियां रोकने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। पिछले वर्ष के मुकाबले मलेरिया का प्रकोप काफी कम है। गांवों में गंदगी और जलभराव को लेकर ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। स्वच्छता और स्वास्थ्य समितियों को भी सक्रिय किया जा रहा है। जलभराव और गंदगी न हो तो मलेरिया काफी हद तक काबू में हो सकता है। सफाई के संबंध में संबंधित विभागों को लिखा जाएगा।
विज्ञापन

-डॉ. विक्रम सिंह पुंडीर, सीएमओ

सालारपुर ब्लॉक के नंदगांव में गंदगी और जलभराव, अब संक्रामक रोग तो फैलेंगे ही। संवाद- फोटो : BADAUN

 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें