बदायूं। अमर उजाला के हिंदी हैं हम अभियान के तहत रविवार को ऑनलाइन कवि सम्मेलन व विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें कवि और साहित्यकारों के अलावा बाहरी कवि भी जुड़े। तंजानिया में बैठे अंतरराष्ट्रीय स्तर के कवि जीतू जलेसरी ने मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत की। सभी ने हिंदी को समृद्ध व जन जन की भाषा बनाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि जीतू जलेसरी ने मां शारदे को नमन करके किया। जीतू जलेसरी मूल रूप से एटा जिले के जलेसर निवासी हैं, और तंजानिया की एक फार्मा कंपनी में महाप्रबंधक हैं। संचालन की बागडोर डीपी महाविद्यालय की प्राचार्य व कवयित्री डॉ. शुभ्रा माहेश्वरी ने संभाली। उन्होंने संक्षिप्त परिचय की रूपरेखा के बाद हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राम बहादुर व्यथित को आमंत्रित किया।
कार्यक्रम को गिंदो देवी कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. उमा सिंह गौर, वरिष्ठ साहित्कार डॉ. ममता नौगरैया, हिंदी शोध छात्रा खालिदा जिया आदि ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में अमर उजाला बरेली के संपादक नितिन यादव की भी सहभागिता रही। उन्होंने सभी का आभार व्यक्त किया।
वीणा की झंकार है हिंदी
साहित्यकार व कवि डॉ. राम बहादुर व्यथित ने पहले हिंदी की महत्ता का बखान किया। बाद में हिंदी से जुड़ी एक रचना सुनाई। उन्होंने पढ़ा-
कबिरा की चादर भीनी सी, तुलसी का श्रृंगार है हिंदी
सूर ठुमक कर नाचें अंगना, वीणा की झंकार है हिंदी।
हिंदी ही है जो सबके दिल में रहती
वेद कथाकार आचार्य संजीव रूप ने हिंदी के बदलते स्वरूप का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले के सभी लोग प्राइमरी स्कूलों में पढ़ाई करके अच्छे पदों को सुशोभित कर रहे हैं। मौजूदा वक्त में बच्चों को अंग्रेजी स्कूल में पढ़ाना श्रेष्ठता का प्रतीक माना जाता है। हिंदी क्षेत्र में बड़ा नाम कर रहे लोगों के बच्चे भी अंग्रेजी स्कूल में पढ़ रहे हैं तो कैसे हिंदी का उद्धार हो सकेगा। कहा कि सरकार प्राइमरी स्कूलों को बेहतर कर रही है। हमें भी चाहिए कि अपने बच्चों को वहां पढ़ाकर नया भारत बनाएं। उन्होंने गीत सुनाया -
विश्व की जननी संस्कृत भाषा की बेटी
हिंदी ही है जो सबके दिल में रहती
दिव्य प्रकाश महाविद्यालय के प्रवक्ता डॉ. मुकेश राघव ने हिंदी की महत्ता बताई। कहा कि आज हिंदी अवाचित नहीं रही, समस्त संसार इसे पढ़ रहा है। यह हमारी मातृभाषा ही नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारी पहचान भी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कवि सम्मेलन और मुशायरा को एक ही मंच पर साझा करना अपने आप में भाषा का संक्रमण काल है जो भाषा प्रेमियों को अवसर या चुनौती भी साबित होगा।
भारत की भाषा हिंदी है
कवि स्वर्गीय बृजेंद्र अवस्थी की पुत्रवधू डॉ. निशि अवस्थी ने सुनाया -
यह राम काव्य की गंगा है यह कृष्ण काव्य कालिंदी है, भारती भाल की बिंदी है, भारत की भाषा हिंदी है।
उन्होंने कहा कि देश की आत्मा हिंदी है, मौलिक सोच की भाषा हिंदी है। हिंदी न सिर्फ भारत की पहचान है, बल्कि यह हमारे जीवन मूल्यों, संस्कृति एवं संस्कारों की सच्ची संवाहक, संप्रेषक और परिचायक भी है। हिंदी विश्व की वैज्ञानिक भाषा है।
हिंदी मेरा अभिमान है..
कार्यक्रम संचालिका डॉ. शुभ्रा माहेश्वरी ने गुनगुनाया-
हिंदी मेरा मान है सम्मान है, हिंदी ही मेरा अभिमान है।
हिंदी ही भाषाओं की जान है,मेरे भाल की शान है हिंदी।
हिंदी का मान बढ़ाएंगे
गिंदो देवी कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मुक्ता सक्सेना ने सुनाया -
आओ मिलकर लें ये शपथ, इस भाषा का मान बढ़ाएंगे।
जिस भाषा ने हमको संपन्न किया, बस इसे ही प्रयोग में लाएंगे।
हिंदी को सरल शब्दों में व्यवहार में लाएं
शहर के वरिष्ठ चिकित्सक व साहित्य प्रेमी डॉ. सुरेश चंद्र नौगरैया ने कहा कि हिंदी के कई कठिन शब्दों का प्रयोग व्यवहार से बाहर हो गया है। इनकी जगह अंग्रेजी व उर्दू ने ले ली है। हमें चाहिए कि हिंदी के सरल शब्दों को व्यवहार में लाएं। परिवार में बोलचाल की भाषा हिंदी को बनाएं तो यह मातृभाषा के प्रति हमारा सम्मान होगा।
दफ्तरों में हिंदी में करें काम
विकास भवन में कार्यरत अंजलि शर्मा भी कार्यक्रम का हिस्सा बनीं। उन्होंने कहा कि सरकारी दफ्तरों का कामकाज हिंदी में कराने पर जोर देना चाहिए। परिवार में भी हम बच्चों को पानी कहने के बजाय उसे अंग्रेजी में बोल रहे हैं जो गलत है।
गूगल अपडेट हुआ तो हम क्यों नहीं
दास कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. एकता सक्सेना ने कहा कि गूगल भी हिंदी में अपडेट हो गया है तो समझना चाहिए कि हिंदी अब विश्वस्तरीय भाषा बनती जा रही है। हाल ही में ओलंपिक में स्वर्ण जीतने वाले नीरज चोपड़ा ने पत्रकार को यह कहकर टोका था कि आप मुझसे हिंदी में बात करें। उन्होंने कहा कि हिंदी और हिंदी भाषी अब किसी से पीछे नहीं हैं।
बोलकर टंकण करने से हिंदी का नुकसान
बनारस से जुड़ीं प्रोफेसर इति अधिकारी ने बताया कि अब लोग गूगल में बोलकर हिंदी टाइप करते हैं। यह ज्यादा खराब बात है। लोग टाइप करने में समय बचाते हैं, पर शब्द ऐसे लिख जाते हैं जो अर्थ का अनर्थ कर देते हैं। टंकण हिंदी में ही और हाथ से करने की आदत डालनी चाहिए।
भारत के भाल पर है स्वाभिमान की बिंदी
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जीतू जलेसरी ने अंत में हिंदी पर अपना काम और अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा कि वह विदेश में रहते हैं। वहां रहने और सामान्य जीवन बिताने के लिए अंग्रेजी का प्रयोग करना पड़ता है। वह इसके पक्षधर भी नहीं कि अंग्रेजी या दूसरी भाषाएं न सीखी जाएं। खुद हिंदी सबको आत्मसात करने वाली भाषा है। बावजूद इसके वह परिवार में बोलचाल हिंदी में करने पर जोर देते हैं। तंजानिया में प्रवासी भारतीयों के बच्चों को हिंदी सिखाने का अभियान शुरू किया था, जो कोरोना संक्रमण काल में प्रभावित हुआ है। यहां तक कि अफ्रीकी बच्चों में भी हिंदी के प्रति ललक है। वह भारत वंशियों के साथ मिलकर हिंदी को समृद्ध बनाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने अपनी रचना सुनाई -
- पद, छंद, दोहा, कविता इसका ही घराना है, संस्कारवान मानव इससे ही बनाना है।
कुछ मान तो रखें हम कवियों की इस कलम का, हिंदी हैं हम बजा दें, हिंदी का जग में डंका।