बदायूं। रिटायर कर्मचारियों के 75 दिन धरना देने के बावजूद सहकारी क्षेत्र की शेखूपुर चीनी मिल ने कर्मचारियों के बकाया देयों का भुगतान नहीं किया। चीनी मिल प्रशासन की अनदेखी परिवार की आर्थिक तंगी की वजह से रिटायर कर्मचारी धीर सिंह की इलाज के अभाव में जान चली गई। इससे पहले इलाज के अभाव में धीर सिंह के एक बेटा और बेटी की मौत हो चुकी है।
शहर में इस्लामिया इंटर कॉलेज के पास रहने वाले धीर सिंह शेखूपुर चीनी मिल में मुख्य समयपाल के पद पर तैनात थे। तीन साल पहले वह सेवानिवृत्त हो गए थे। इसके बाद से देयों के भुगतान के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहे थे। इस दौरान उनके एक बेटे और एक बेटी भी बेहतर इलाज न मिलने के कारण मौत हो गई। कुछ समय से धीर सिंह भी बीमार थे। देयकों के भुगतान की मांग को लेकर रिटायर्ड कर्मचारियों ने 74 दिन पहले मालवीय आवास पर धरना शुरू किया तो धीर सिंह भी धरने में शामिल हुए। पिछले चार-पांच दिन से तबियत ज्यादा खराब होने के कारण धरना स्थल नहीं पहुंच रहे थे। आर्थिक तंगी के कारण परिवार उनका इलाज नहीं करा सका और धीर सिंह की मौत हो गई।
धीर सिंह के परिवार में अब पत्नी मुन्नी देवी, बेटी रश्मि और बेटा रिंकू सिंह हैं। रिंकू सिंह मानसिक मंदित हैं। ऐसे में परिवार के सामने संकट खड़ा हो गया है। धीर सिंह की पत्नी मुन्नी देवी का कहना है कि अगर उनके पति के देयकों का भुगतान समय से हो गया होता तो उनके एक बेटे, एक बेटी और बाद में पति की इलाज के अभाव में मौत नहीं होती।