बदायूं। चार नवंबर को दिवाली से पहले दो नवंबर को धनतेरस होगी। मान्यता है कि धनतेरस के दिन मूल्यवान धातु की वस्तु खरीदने से लक्ष्मी प्रसन्न होतीं हैं। धनतेरस और दिवाली से पहले बाजार सज गए हैं। बड़े सराफा व्यापारियों के यहां ज्वैलरी की बुकिंग शुरू हो गई है। इस बार सराफा बाजार में चांदी की श्रीगणेश-लक्ष्मी की प्रतिमाएं सबसे ज्यादा आकर्षित कर रही हैं। बर्तन बाजार भी गुलजार है। पीतल और तांबे के बर्तनों के साथ मूर्तियों की भी काफी मांग है।
पिछले वर्ष तीन माह के लंबे लॉकडाउन और उसके बाद तीन महीनों तक कोरोना के प्रकोप का असर बाजार पर बन रहा था। चरणबद्ध तरीके से अनलॉक किया गया। लॉकडाउन में लोग आर्थिक तंगी का शिकार हो गए। इसका असर भी दिवाली पर सराफा और बर्तन बाजार पर दिखा था। इस बार हालात सामान्य हैं। नवंबर के पहले सप्ताह में ही त्योहारों की झड़ी लग जाएगी। सरकार ने भी दिवाली से पहले कर्मचारियों को वेतन भुगतान का आदेश दिया है। ऐसे में व्यापारियों को अच्छे कारोबार की उम्मीद है। सराफा बाजार में तो ज्वैलरी की बुकिंग भी शुरू हो गई है। बर्तन बाजार में भी इस बार तरह-तरह के आइटम, मूर्तियों और बर्तन ग्राहकों को खूब लुभा रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि पिछले वर्ष की तुलना इस वर्ष बाजार में अभी से ज्यादा रौनक है।
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यह बोले व्यापारी
सराफा बाजार अब कोरोना की मार से उबरने लगा है। पिछले वर्ष सहालग से लेकर त्योहार तक का सीजन कोरोना संक्रमण की भेंट चढ़ गया था। इस बार बाजार में अच्छी रौनक है। ग्राहकों की पसंद के हिसाब से बाजार में ज्वैलरी और प्रतिमाएं बाजार में उपलब्ध हैं।
-कमल गुप्ता, सराफा व्यापारी
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कोरोना संक्रमण ने सबसे ज्यादा सराफा बाजार को ही प्रभावित किया था। साराफा बाजार में खरीदारी के दिन त्योहार या फिर सहालग का सीजन ही होता है। इस बार सराफा बाजार को त्योहार से काफी उम्मीद है। दिवाली से पहले बाजार में ग्राहक आने लगे हैं।
- सुमित वर्मा, सराफा व्यापारी
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धनतेरस और दिवाली पर सभी लोग धातु की कोई न कोई वस्तु खरीदते हैं। काफी संख्या में ऐसे लोग होते हैं जो सोने और चांदी की खरीद नहीं कर सकते। यह लोग परंपरा को निभाने के लिए पीतल और तांबे के बर्तन खरीदते हैं। बाजार को दिवाली से काफी उम्मीद है।
-कृष्ण गोपाल, बर्तन व्यापारी
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सराफा बाजार से कहीं ज्यादा दिवाली पर बर्तन बाजार को उम्मीदें हैं। बर्तन बाजार पर भी पिछले वर्ष कोरोना की मार रही। इस बार बर्तन बाजार को काफी उम्मीदें हैं। बाजार सज गया है और ग्राहक भी तांबे-पीतल के बर्तन, मूर्तियों आदि देखने पहुंचने लगे हैं।
-निरवेश, बर्तन व्यापारी