फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बसपा के वोट बैंक पर भाजपा की नजर

विज्ञापन
विज्ञापन
अमित सक्सेना
विज्ञापन

बदायूं। भाजपा कई दिन से जबर्दस्त तोड़फोड़ मचाए हुए है। वह जिले स्तर पर दूसरी पार्टियों के नेताओं को अपने साथ जोड़ रही है। इनमें सर्वाधिक संख्या व फोकस बसपा से जुड़े नेताओं पर है। कई पूर्व जिलाध्यक्ष व कोआर्डिनेटर को भाजपा ने अपने साथ मिला लिया है और बसपा के कैडर वोट में सेंध लगाने की तैयारी है। भाजपा नेताओं से उलट बसपाई शांत तरीके से गांवों बस्ती तक वोटरों से संवाद कर रहे हैं। बसपा नेताओं का कहना है कि उनका कैडर वोट पूरी तरह उनके साथ है। वह बसपा सुप्रीमो को छोड़कर कहीं नहीं जाएगा।
हाल ही में भाजपा के जिला कार्यालय पर अलग-अलग दिनों में पार्टी में तमाम नेता शामिल हुए हैं। इनमें सर्वाधिक संख्या बसपा से जुड़े नेताओं की है। इनमें राममूर्तिलाल एडवोकेट, बुधपाल सिंह और श्याम कुमार दिवाकर जैसे बड़े नाम हैं जो अलग-अलग वर्षों में बसपा के जिलाध्यक्ष व कोआर्डीनेटर रहे हैं। साथ ही भीमसेन सागर जैसे कैडर वाले बसपा नेता भी अब भाजपा का झंडा बुलंद करने में लगे हैं। एकाएक बदल रहे सियासी मौसम को चुनावी रणनीतिकार भी अलग-अलग चश्मे से देख रहे हैं। माना जा रहा है कि शीर्ष स्तर पर बसपा नेताओं के शांत रुख को देखकर अपने भविष्य के मद्देनजर स्थानीय नेताओं ने यह डगर चुनी है। चुनाव के बाद किसी दल में जाने की बजाय उन्होंने अभी से पत्ते खोलना बेहतर समझा और ऐसे में सपा के बजाय भाजपा को मुफीद माना।
विज्ञापन

भाजपा में आए अधिकतर बसपा नेता अब अनुसूचित जाति बाहुल्य गांवों व बस्तियों में सभाएं करके लोगों को भाजपा को भाजपा की नीतियां बताकर साधने में लगे हैं। वह तर्क दे रहे हैं कि बसपा में अब कुछ बचा नहीं और सपा की सरकार आ गई तो शोषित समाज को ज्यादा मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। इसलिए भाजपा ही बेहतर विकल्प बता रहे हैं। जनता इनकी बात मानेगी या खारिज करेगी ? ये तो चुनाव परिणाम ही बताएगा। फिलहाल इन नेताओं ने अपनी ओर से सजातीय वोटों के ध्रु वीकरण की पूरी तैयारी कर रखी है।
-
भाषणों में केवल सपा के खिलाफ ही धार
पिछले दिनों भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के नेताओं ने जिले में रैलियां की थीं। इस दौरान इन नेताओं ने सिर्फ सपा को ही निशाने पर रखा। बसपा सुप्रीमो मायावती को लेकर खास तल्ख बयान देने से भाजपा नेता बचते रहे। अब भाजपा के स्थानीय नेता भी लगभग उसी तर्ज पर काम कर रहे हैं। नुक्कड़ सभा या छोटे कार्यक्रमों में उनके बयानों की धार भी सपा तक सीमित नजर आती है। इस कवायद को भी बसपा के वोटरों को साधने के तौर पर देखा जा रहा है।
-
इस चुनाव में भाजपा को मिलेगा शोषित वर्ग का पूरा साथ
पूरे प्रदेश में बसपा सरेंडर की स्थिति में है। सबको पता है कि भाजपा दोबारा सरकार बनाने जा रही है। सपा सरकार में गुंडागर्दी की वजह से शोषित वर्ग ने बहुत सितम झेले हैं। इसलिए इस वंचित वर्ग का अधिसंख्य वोट भाजपा प्रत्याशियों को मिलना लगभग तय है। बसपा के कैडर वाले वरिष्ठ नेताओं का आशीर्वाद हमें लगातार मिल रहा है। इसकी बदौलत भाजपा प्रत्याशियों की जीत का आंकड़ा सभी विधानसभा क्षेत्रों में अप्रत्याशित रूप से बढ़ना तय है।
विज्ञापन

- राजीव गुप्ता, जिलाध्यक्ष, भाजपा
-
इन नेताओं पर वोट ही नहीं, इनके जाने से बहुजन समाज को खुशी मिली
वर्ष 2013 में बसपा सुप्रीमो मायावती ने श्याम कुमार दिवाकर को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। फिर वह कांग्रेस में चले गए। उनकी पत्नी 2018 में कांग्रेस से शहर नगर पालिका चेयरमैन का चुनाव लड़ीं। ऐसे में उन्हें बसपा से जोड़ना गलत है। अन्य नेताओं की भूमिका भी सही नहीं थी और उनके जाने से बहुजन समाज को खुशी ही हुई। बसपा का कैडर वोट किसी नेता की संपत्ति नहीं है, वह बसपा सुप्रीमो के इशारे पर ही जाता है।
- हेमेंद्र गौतम, जिलाध्यक्ष बसपा
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें