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सबसे गंदा है बदायूं का रोडवेज

Tue, 27 Jun 2017 11:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो              बदायूं।
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कोसों दूर - फोटो : अमर उजाला
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लगता है बरसों से नहीं की गई बस अड्डे के आसपास की सफाई
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सवारियों का थोड़ी देर रुकना भी हो जाता है मुश्किल
यूं तो पूरे देश में स्वच्छ भारत अभियान की लहर चल रही है। कई शहर स्मार्ट सिटी की दौड़ में शामिल हैं, लेकिन बदायूं के लोग इससे अब भी कोसों दूर हैं। शहर में दाखिल होने वाले दूसरे शहर के लोगों की जबान पर यहां की गंदगी का चर्चा सबसे पहले सुनाई देता है। क्योंकि शहर का रोडवेज बस अड्डे पर है ही इतनी गंदगी जिसे देखकर लगता है कि यहां बरसों से सफाई नहीं हुई है। बस अड्डे के आसपास और चौराहे पर पड़ी गंदगी और कूड़े के ढेर को देखकर लगता है जैसे पूरे शहर का कूड़ा यहीं लाकर डाला जाता है।
रोडवेज बसें जीआईसी के गेट के पास जहां खड़ी होकर सवारियों और उतारती और बैठाती हैं, वहां कूड़ा ही कूड़ा नजर आता है, इतना कि थोड़ी देर के लिए रुकना भी मुश्किल हो जाता है। हैंडपंप जहां लगा है, उसके इर्द-गिर्द भी कूड़ा ही कूड़ा पड़ा है, मजबूरन लोग प्यास से व्याकुल होकर इस हैंडपंप का पानी पीने को विवश हैं, लेकिन अफसोस की बात यह है कि इस कूड़े और गंदगी को हटवाने की चिंता किसी को नहीं है। न तो रोडवेज के अधिकारियों को इससे कोई मतलब है, न ही नगर पालिका के अधिकारियों तथा कर्मचारियों को इसकी चिंता है और जनप्रतिनिधियों को तो इससे कोई सरोकार नहीं। रोडवेज से बाहर से आने-जाने वाले यात्री इस कूड़े को देखकर बदायूं की किस तस्वीर की कल्पना करते होंगे, इसकी चिंता भी किसी को नहीं है।
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बदायूं बस स्टैंड से रोजाना हजारों यात्री सफर करते है, जनप्रतिनिधि, अधिकारियों के वाहन भी इसी चौराहे से निकलते हैं, फिर भी रोड पर फैली गंदगी और चोक नालों की स्थिति जस की तस है। लोगों का कहना था कि महीनों से सफाई कर्मचारी को झाड़ू लगाते नहीं देखा है, रोड पर हमेशा गंदगी फैली रहती है, चोक नालों की स्थिति इतनी बिगड़ गई है कि गंदगी से भरे नाले रोड के बराबर आ गए है। कई बार धोखा खाकर लोग नाले में गिर चुके है। बसस्टैंड चौराहे पर रहने वाले अब्दुल रहीम कहते हैं कि अफसरों की उदासीनता और सफाई कर्मचारियों की लापरवाही का खामियाजा आम आदमी को भुगतना पड़ रहा है।             

क्या कहते है शहरवासी
- रोडवेज चौराहे पर किराने की दुकान करने वाले मनीष बोले कि शहर में गंदगी के जिम्मेदार नगरपालिका के अफसर दफ्तरों में बैठे रहते हैं। पूरे शहर का हाल बेहाल है। जिम्मेदार अधिकारी सफाई कर्मचारियों से कुछ कराना नहीं चाहते, आने वाले दिनों में गंदे पानी में शहर तब्दील हो जाएगा।             
-रामबहादुर ने कहा कि चुनाव नजदीक आते ही चेयरमैन और सभासदों को शहर में सफाई की याद आती है और चुनाव जीतते ही सब भूल जाते। इसी तरह से शहर में साफ-सफाई व्यवस्था चौपट रही तो वह इस बार सभासद के चुनाव में वोट नहीं करूंगा।     
- दीपक ने बताया कि शहर की सफाई व्यवस्था पटरी से उतर गई है। इसे फिर से पटरी पर लाने के लिए जनता को ठोस कदम उठाना पड़ेगा, सफाई कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी ढंग से नहीं निभा रहे हैं। चुनाव में इसका परिणाम देखने को मिल जाएगा।           
- शैलेंद्र बताते हैं कि चौराहे पर गंदगी की सफाई न होने के कारण पब्लिक भी कचरा यही डालती है। हजारों की संख्या में रोजाना आने-जाने वाले यात्रियों को इसके चलते काफी समस्या उठाना पड़ती है। जल्द सफाई नहीं कि गई तो बीमारी फैलना शुरू हो जाएगी।
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- रोडवेज चौराहे पर पानी सप्लाई करने वाले अनु ने बताया कि रोड पर लगे गंदगी के ढेर से नाले पूरे तरह भर चुके है, महीनों से कोई सफाई कर्मचारी दिखाई नहीं दिया, दुकान के बाहर खुद झाड़् लगानी पड़ती है। गंदगी के चलते ग्राहक दुकान पर नहीं आना चाहते है।
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