बदायूं। बिल्सी सीट पर भाजपा को जिले में सबसे बड़ी जीत मिली है। छात्र नेता से पिछड़ों की राजनीति में पकड़ बनाने वाले हरीश शाक्य ने यहां महान दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष के बेटे को धूल चटा दी। खुद को स्थानीय बताने वाली बसपा प्रत्याशी को काफी पीछे छोड़ दिया।
बिल्सी सीट से पहले आरके शर्मा भाजपा के विधायक थे जो चुनाव से पहले पार्टी छोड़कर सपा में चले गए और आंवला से पूर्व मंत्री धर्मपाल सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ने पहुंच गए। उनकी जगह खाली हुई तो सवर्ण समाज के कई चेहरों ने बिल्सी सीट पर दावा ठोंक दिया। इन्हीं दिनों स्वामी प्रसाद मौर्य भाजपा छोड़कर गए तो डैमेज कंट्रोल के लिहाज से भाजपा ने यहां हरीश शाक्य को टिकट थमा दिया। हरीश मूल रूप से दातागंज क्षेत्र के निवासी थे, इसलिए बसपा प्रत्याशी ममता शाक्य उन्हें बाहरी और खुद को स्थानीय बताकर अपना वोट बैंक साधती रहीं। हरीश चूंकि संगठन के नेता रहे हैं और विद्यार्थी परिषद से लेकर भाजयुमो तक पदाधिकारी रहे तो संगठन के बदौलत उन्होंने सपा गठबंधन प्रत्याशी को 25 हजार के बड़े अंतर से चुनाव हरा दिया। जबकि चंद्रप्रकाश मौर्य दो दलों के संयुक्त प्रत्याशी होने के साथ ही महान दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष केशव देव मौर्य के बेटे थे। कांग्रेस प्रत्याशी भी यहां खास करिश्मा नहीं कर सके। वह मुकाबले में पुरी तरह पिछड़ गए।
बता दें कि बिल्सी सीट का मिजाज कुछ ऐसा ही रहा है कि यहां हर बार नया विधायक ही बनता है। आरके शर्मा 2017 में यहां चुनाव जीते। इससे पहले हाजी बिट्टन 2012 में यहां विधायक बने जो सहसवान सीट से बसपा के प्रत्याशी बतौर हारे हैं। उससे पहले बिल्सी सुरक्षित सीट थी। यहां कांग्रेस चुनाव जीतती रही और अनुसूचित वर्ग के विधायक बनते रहे। दो बार से भाजपा यहां जीत रही है। यहां ठाकुर व मौर्य शाक्य वोट काफी है, माना जा रहा है कि वही भाजपा प्रत्याशी की जीत का आधार बना। संवाद