बदायूं। बिसौली सीट पर मतगणना के अंतिम दौर तक जोरदार मुकाबला चला। दोबारा मतगणना का शोर भी मचा पर आखिर में भाजपा प्रत्याशी कुशाग्र करीब डेढ़ हजार के अंतर से चुनाव हार गए। सपा प्रत्याशी को सवर्ण खासकर ठाकुर व ब्राह्मण वोटरों का साथ मिलना इसका वजह बताई जा रही है।
बिसौली सुरक्षित सीट को लेकर कयास बिल्कुल सही निकला। यहां मुख्य मुकाबला सपा और भाजपा के बीच ही माना जा रहा था जो सही निकला और परिणाम बेहद कम वोटों से हारजीत के रूप में सामने आया। सपा के प्रत्याशी पूर्व विधायक आशुतोष मौर्या उर्फ राजू अपने प्रतिद्वंद्वी भाजपा विधायक कुशाग्र सागर से वोटों के अंतर में दिन भर ऊपर नीचे होते रहे। बसपा को यहां मजबूती नहीं मिल सकी। इस लिहाज से समझा जा रहा है कि भाजपा प्रत्याशी कुशाग्र सागर ने बसपा के कैडर वोट को भी साधने में कामयाबी हासिल की। हालांकि बिसौली के चुनाव को लेकर बड़ी चर्चा थी कि जिले भर में सर्वाधिक एससी एक्ट के मामले यहीं दर्ज हुए। इसे लेकर मौजूदा विधायक पर दोषारोपण किया गया। ठाकुर और ब्राह्मण समाज के तमाम लोगों ने इसकी शिकायतें भी कीं। माना जा रहा है कि इसी नाराजगी को सपा प्रत्याशी ने भुना लिया। उन्होंने सपा के यादव, मुस्लिम वोटरों को साधने के साथ ही सवर्णों का बड़ा वोट बैंक भी साधने में कामयाबी हासिल की।
कुछ लोग योगेंद्र सागर फैक्टर को भी कुशाग्र की हार की वजह बता रहे हैं। कुछ माह पहले ही कुशाग्र के पिता पूर्व विधायक योगेंद्र सागर को उम्रकैद की सजा हुई थी। माना जा रहा है कि इस सजा से पुराने जख्म ताजा हुए और सवर्ण वर्ग के काफी वोटर किनारा कर गए। यहां बसपा कोई खास करिश्मा न कर सकी तो कांग्रेस यहां खिसकर कर पांचवे नंबर पर पहुंच गई। उससे ज्यादा वोट जन अधिकार पार्टी की प्रत्याशी ने हासिल कर लिए। संवाद