बदायूं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जनपद की प्रत्येक ग्राम पंचायत पर एक बीसी सखी रखी जाएगी। ताकि गांव में बैंकिंग से जुड़ी सुविधाएं मिल सकें। 1037 ग्राम पंचायतों में अभी 969 महिलाएं बीसी सखी बनकर काम रहीं थीं। इसमें से कुछ महिलाओं ने यह काम छोड़ दिया है। इसके कारण विभाग की ओर से 95 और बीसी सखी बनाई जााएंगी।
जनपद में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार देकर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से समूह की महिलाओं को बीसी सखी बनाने के लिए आवेदन मांगेे गए हैं। आवेदन करने के बाद विभाग की ओर से इनका चयन किया जाएगा। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन महिलाओं को ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान की ओर से सात दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद प्रत्येक ग्राम पंचायत में बीसी सखी काम करेंगी।
बीसी सखी गांव में घर- घर जाकर बैंकिंग सुविधाएं प्रदान करती हैं। इसके लिए विभाग की ओर से शुरू में इन महिलाओं को छ: माह तक 4 हजार रुपये का मानदेय दिया जाता है। उसके बाद वह महिलाओं को किए गए कार्य पर कमीशन दी जाती है।
जनपद की प्रत्येक ग्राम पंचायत पर बैंकिंग सुविधा के लिए बीसी तैनात की जाएंगी। इसके लिए बची हुई 95 ग्राम पंचायतों के लिए बीसी सखी के लिए आवेदन मांगे गए हैं। बीसी सखी बनकर महिलाएं अच्छी आय अर्जित कर रहीं हैं। - अखिलेश चौबे, डीसी एनआरएलम