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गरीबों का राशन खा रहे अमीर...कोई मैरिज हॉल तो कोई स्कूल का है मालिक

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गरीबों का राशन खा रहे अमीर...कोई मैरिज हॉल तो कोई स्कूल का है मालिक
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बदायूं। गरीबों के हक पर डाका डाला जा रहा है, और उनका हक छीना जा रहा है..., यह इसी से पता चलता है कि ऐसे लोगों ने राशन कार्ड बनवा लिए जो किसी भी हाल में करोड़पति से कम नहीं हैं। इस बात का खुलासा तब हुआ जब ऐसे लोगों के अपनों ने ही विभागीय अधिकारियों तक शिकायतें पहुंचाईं। जांच हुई तो मामला सही पाया गया। जिला पूर्ति अधिकारी ने खुद ही स्थलीय जांच में इस मामले को उजागर किया। डीएसओ ने पकड़ में आए ऐसे छह अपात्र लोगों को अपने राशनकार्ड सरेंडर कर निरस्त कराने के आदेश दिए हैं, साथ ही यह भी कहा है कि ऐसे अन्य सभी अपात्र कार्डधारक 25 जनवरी तक आपूर्ति कार्यालय में राशन कार्ड सरेंडर कर दें। इसके बाद अपात्रों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
सरकार गरीबों के हित में तमाम योजनाएं चला रही है। कोई गरीब भूखा न रहे इसके लिए उसे महीने भर का राशन देती है। मगर उनके हक पर अमीर डाका डाल रहेे हैं। यह अमीर गरीबों को दिया जाने वाला राशन खुद खा रहे हैं। राशन लेने वाले इन धन्ना सेठों का खुलासा तब हुआ जब कुछ लोगों ने उनकी शिकायत विभागीय अधिकारियों तक पहुंचाई। जिला पूर्ति अधिकारी रामेंद्र सिंह ने किसी अन्य से जांच न कराकर खुद ही बुधवार को उन सभी की स्थलीय जांच की। डीएसओ भी उनकी कोठियां और दुकान को देखकर चौंक गए। छह कार्डधारक पूरी तरह से जांच में अपात्र पाए गए। डीएसओ ने तुरंत ही एक्शन लेते हुए उन सभी को राशन कार्ड सरेंडर कर निरस्त कराने के आदेश दे दिए।
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ये ‘कागजी गरीब’ ले रहे थे राशन
-नीलोफर पत्नी मोहम्मद शहजाद- गैराज, चार सौ वर्ग का प्लॉट, बैंक एटीएम आदि
-शाहीन बेगन पत्नी शरीफ अहमद- पुत्र सऊदी अरब में सेवारत, काफी बड़ा दो मंजिला मकान
-बबिता साहू पत्नी संजीव कुमार- बड़ा मकान, बीज का व्यवसाय
-कहकशां पत्नी मोहम्मद जाबिर जैदी- दो मंजिला मकान, अलीका पब्लिक स्कूल के मालिक
-नजमा पत्नी अनवर- तीन मंजिला मकान, एसएस लॉन, मैरिज हाउस के मालिक
-नुजहत बेगम पत्नी सरफराज- सिटी कांपलेक्स के मालिक, आर्थिक स्थिति काफी अच्छी
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राशन माफिया पर शिकंजा...तो कैसे बन गए अपात्रों के कार्ड
डीएम दिनेश कुमार सिंह ने राशन माफिया पर पूरी तरह से अंकुश लगाने को जो व्यवस्था लागू की थी, उस पर शासन ने भी अपनी मुहर लगाते हुए पूरे प्रदेश में लागू कर दिया है। सवाल उठ रहा है कि जब इतनी अच्छी व्यवस्था लागू की गई तब अपात्रों के राशनकार्ड कैसे बन गए। वे किस तरह राशन की वस्तुएं हासिल करते रहे। उनके खिलाफ क्यों एक्शन नहीं लिया गया। जाहिर है कि इन सभी से जिम्मेदारों पर सवाल उठना लाजिमी है।
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...फिर क्या देखा जाता है वितरण के वक्त
राशन व्यवस्था को बेहतर बनाने को डीएम की ओर से हर कोटेदार के यहां वितरण के समय अन्य विभागों के कर्मचारियों को ड्यूटी पर लगाया जाता है। तब यह सवाल उठ रहा है कि सत्यापन कर्मचारी मौके पर क्या देखते हैं।
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जो भी अपात्र कार्डधारक पकड़ में आए हैं उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो रही है। जिले के सभी अपात्र कार्डधारकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे 25 जनवरी तक अपने राशनकार्ड आपूर्ति कार्यालय में सरेंडर कर दें। जांच में पकड़े जाने पर मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
-रामेंद्र सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी
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