केस 1- एलडीए कॉलोनी निवासी प्रदीप कुमार के पते पर नोटिस पहुंचा है। इसमें 1765 रुपए बिल बकाया बताया गया है। नोटिस में जो मोबाइल नंबर 9450913572 है, वह कभी प्रदीप के पास रहा ही नहीं।
केस 2- एल-45 एलडीए कॉलोनी में ही रहने वाले रोहित सिंह को भी इसी तरह का एक नोटिस मिला है। इन्हें भी मोबाइल नंबर 9415410651 के बकाए के एवज में नोटिस दिया गया है।
ये दो मामले तो सिर्फ बानगी भर है। बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्होंने बीएसएनएल का सिम कभी नहीं खरीदा, लेकिन बीएसएनएल ने उन्हें उपभोक्ता बना दिया।
दी पुलिस कार्रवाई की चेतावनी
यही नहीं उन्हें बिल जमा करने का नोटिस भी भेज दिया गया है। जुर्माना व पुलिस कार्रवाई तक की चेतावनी भी दी गई है।
फ्रेंचाइजी के फर्जी आईडी का खेल हो या बीएसएनएल की कोई चूक, लेकिन इन सबसे उपभोक्ता परेशान हैं। चेतावनी भरी नोटिस ने उनकी नींद हराम कर दी है।
वहीं, बीएसएनएल के अधिकारी कोई सुनवाई करने के बजाय केवल बिल जमा करने की हिदायत दे रहे हैं।
मोबाइल नंबर्स मिले बंद
जिन मोबाइल नंबरों के उपभोक्ताओं को नोटिस दिया गया है जब उन पर कॉल की गई, तो वे बंद मिले। यह नंबर अब किसके पास हैं इसकी जानकारी बीएसएनएल अधिकारियों को नहीं है।
जानकारों के मुताबिक, यह फर्जी आईडी का कारोबार हो सकता है। प्रीपेड में तो ऐसा बहुत होता है। फ्रेंचाइजी वाले समय पर आईडी नहीं भेजते।
किसी के सिम के साथ किसी की आईडी लगा देते हैं। वहीं, कुछ लोग गलत नीयत से किसी दूसरे की आईडी हथियाकर उस पर सिम ले लेते हैं।
आईडी जिसकी लगी, नोटिस तो जाएगा ही
वहीं, जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि गलती से भी नोटिस जा सकता है, लेकिन जो पता बीएसएनएल के पास होगा ही नहीं, उस पर नोटिस जाना मुश्किल है।
हो सकता है कि कुछ समय तक उसने बिल जमा किया हो। उसके बाद एक सीमा तक बिल होने के बाद उसने बंद कर दिया हो। नोटिस तो उसी के पते पर जाएगी, जिसकी आईडी लगी है।