यूपी के कवाल कांड की कथित वीडियो फेसबुक पर शेयर किए जाने को लेकर रासुका में निरुद्ध सरधना विधायक संगीत सोम ने गृह सचिव को जवाब भेज दिया है।
सोम ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। विधायक का दावा है कि जेल में शिफ्ट किए जाने की तारीखों में कई झोल किए गए।
भाजपा एमएलए ने मामले की सीबीआई से जांच की मांग करते हुए कहा कि मुजफ्फरनगर के डीएम को कानूनन रासुका संस्तुति का कोई अधिकार ही नहीं था।
उरई जेल से विधायक संगीत सोम ने गृह सचिव, राज्य गृह सचिव, प्रदेश सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष, डीएम मुजफ्फरनगर और उरई को रासुका पर जवाब दाखिल कराया है।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनिल जिंदल ने बताया कि संगीत सोम ने कवाल की कथित वीडियो शेयर करने से इंकार किया है। उनके ब्रॉडबैंड और मोबाइल नंबर की जांच से यह साफ भी हो जाएगा।
एसएसपी, एसपी सिटी, सीओ सिटी और शहर कोतवाल ने रासुका के लिए भेजी रिपोर्ट में 21 सितंबर को उन्हें उरई जेल में बंद दिखाया है, जबकि वे इस दिन मुजफ्फरनगर कोर्ट के बाद यहीं के जेल में शिफ्ट किए गए थे।
22 सितंबर को वे उरई जेल गए, इसी दिन रासुका लगाई गई।
विधायक का कहना है कि ऐसे में उन पर यह कार्रवाई करने का अधिकार डीएम मुजफ्फरनगर नहीं, डीएम उरई को था।
रासुका के आदेश पर बॉल पेन से डीएम कार्यालय से 22 सितंबर लिखा गया है, जबकि यह कार्रवाई अगले दिन हुई। विधायक को दिए आदेश में प्रिंट लाइन में यह झोल पकड़ा गया, जहां 23 सितंबर की तिथि अंकित है।
विधायक संगीत सोम का कहना है कि नंगला मंदौड़ में सामाजिक मुद्दों पर पंचायत थी। बहू-बेटियों के सम्मान के लिए लोग एकत्र हुए थे। वहां भड़काऊ भाषण देने जैसी कोई बात नहीं है।