केंद्रीय राज्यमंत्री डा. संजीव कुमार बालियान के साथ आखिर कौन षडयंत्र कर रहा है? अमर उजाला से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि जिसे किसानों की नाराजगी बताई जा रही है, बात वह नहीं है। बालियान का कहना है कि किसान तीनों कृषि कानूनों को लेकर नाराज नहीं हैं। उनके बीच में कुछ स्थानीय मुद्दे और चिताएं हैं, उसका समाधान चाहते हैं। बालियान इसके समाधान की दिशा में सक्रिय हैं। उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष चौधरी अजीत सिंह, उपाध्यक्ष जयंत चौधरी समेत अन्य पर आरोप लगाते हुए कहा कि ये लोग जानबूझकर उन्हें किसानों के बीच बदनाम करना चाहते हैं।
बालियान का कहना है कि वह सोमवार को मुजफ्फरपुर जिले के शाहपुर क्षेत्र के सोराम गांव में एक तेरहवीं में गए थे। लेकिन ऐसे संवेदनशील समय पर वहां रालोद का स्थानीय अध्यक्ष कुछ कार्यकर्ताओं के साथ आकर नारेबाजी और अभद्रता करने लगा। बालियान का कहना है कि उस समय वह घर के भीतर बैठे थे। बाद में बाहर आए तो देखा कि पुलिस ने कुछ लोगों को पकड़ रखा है। सब राष्ट्रीय लोकदल से जुड़े लोग थे। उन्होंने पुलिस से इन कार्यकर्ताओं को छोड़ देने को कहा, लेकिन तब तक रालोद के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने ट्वीट कर दिया।
संजीव कुमार बालियान का कहना है कि वह लगातार क्षेत्र में जाते रहते हैं। किसानों के बीच में तीनों कृषि कानूनों को लेकर चर्चा करते हैं। लोगों से मिलते-जुलते हैं। किसान तीनों कृषि कानूनों को लेकर नाराज नहीं है। उन्हें कभी भी तीनों कृषि कानून किसानों के बीच में नाराजगी का मुद्दा नहीं लगा। मुजफ्फरनगर की भाकियू द्वारा बुलाई गई पंचायत के बारे में पूछने पर बालियान ने कहा कि उसके कारण भावनात्मक थे। वहां राकेश टिकैत के रोने के कारण किसानों का जमघट हुआ था।
किसानों की चिंता और नाराजगी का कारण कुछ दूसरे मुद्दे हैं। वह उन मुद्दों पर अभी कोई चर्चा नहीं करना चाहते। बालियान का कहना है कि वह किसानों के इन मुद्दों की चर्चा पार्टी और सरकार के फोरम पर कर रहे हैं। वह लगातार किसानों से जुड़े मुद्दों को उठाते हैं और उनके लिए लड़ते हैं। बालियान के मुताबिक उन्हें किसानों और क्षेत्र के हित के लिए लड़ना आता है और लड़ते रहेंगे।
बालियान ने कहा कि तीनों कृषि कानूनों को लेकर किसानों के बीच में नाराजगी कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। इस मुद्दे पर किसानों को भ्रमित किया जा रहा है। ध्यान देने की बात है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। प्रधानमंत्री किसानों का और किसान प्रधानमंत्री का खूब आदर करते हैं। मुझे लगता है कि जल्द ही सरकार की किसानों के साथ बातचीत शुरू हो जाएगी और तीनों कृषि कानूनों पर स्थिति स्पष्ट होने के बाद यह मुद्दा भी खत्म हो जाएगा।