शहनाई के जादूगर भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के इंतकाल के सात साल बाद भी वाराणसी में उनकी कब्र पर मकबरे के लिए दो ईंट तक मयस्सर नहीं हो सकी है।
पता चला है कि उनकी याद में मकबरा सिर्फ इसलिए नहीं बन पा रहा है ,क्योंकि जहां उन्हें दफनाया गया, उस जमीन को लेकर शिया और सुन्नी समुदाय के लोग अपना-अपना दावा करते हुए लड़ रहे हैं। 21 अगस्त को भारत रत्न की पुण्य तिथि पर उनके चाहने वाले श्रद्धा के दो पुष्प कब्र की मिट्टी पर ही अर्पित करेंगे।
शास्त्रीय संगीत के बनारस घराने से शहनाई को विश्व पटल पर पहुंचाने वाले भारत रत्न बिस्मिल्लाह खां के इंतकाल के वक्त तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने घोषणा की थी कि राज्य सरकार उस्ताद के नाम पर शहनाई एकेडमी की स्थापना करेगी।
अब सात साल बाद भी यूपी में सरकार सपा की ही है लेकिन शहनाई एकेडमी की स्थापना तो दूर, अभी तक उनके इस्तेमाल की वस्तुओं को भी यादों के तौर पर नहीं सहेजा जा सका। खां के पार्थिव शरीर को जहां दफनाया गया, वह भी विवादों में उलझ गया है।
दरगाहे फातमान में जहां उनकी कब्र है, वहां अभी तक सिर्फ मिट्टी ही डाली जा सकी है। लोहे की एंगल से कब्र को घेर कर एक बैनर जरूर लगा दिया गया है, जिस पर उनके चित्र के नीचे जन्म और इंतकाल की तिथियां अंकित हैं। सितार वादक पं. देवव्रत मिश्र ने भी मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर उस्ताद का मकबरा बनवाने की आवाज उठाई है, ताकि उनके चाहने वालों को सुकून मिल सके।
इतने साल बाद भी भारत रत्न का मकबरा न बन पाना बेहद अफसोस की बात है। उनकी कौम के लोगों को भी चाहिए कि जो विवाद हो उसे आपस में बैठकर सुलझा लें।
--गिरिजा देवी, प्रख्यात ठुमरी गायिका
अब्बा भारत रत्न थे। अब अब्बा की कब्र के साथ तो कम से कम यह सुलूक नहीं किया जाना चाहिए। सरकार को चाहिए कि मकबरा शीघ्र बनवाए, ताकि उस स्थल को धरोहर के रूप में याद किया जा सके।
--नाजिम हुसैन, बिस्मिल्लाह खां के छोटे पुत्र
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के जनाजे को जहां दफनाया गया है, उस कब्र की जमीन को लेकर सुन्नी समुदाय के कुछ लोग लड़ रहे हैं। अब सुन्नी समुदाय के लोग भी चाहते हैं कि इस मामले में सुलह हो जाए। जल्द ही मिल बैठक इस प्रकरण को सुलझा लिया जाएगा।
-अब्बास रिजवी शफक, मुतवल्ली, दरगाहे फातमान