श्राद्ध पक्ष में भी कर सकते हैं खरीदारी
बिजनौर। धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के ज्योतिषविद पंडित ललित शर्मा के अनुसार श्राद्ध पक्ष में बाजार में खरीदारी की जा सकती है। नई चीजें खरीदने या सुख सुविधा बढ़ने से पितृ कभी नाराज नहीं होते हैं बल्कि उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
पंडित ललित शर्मा के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से श्राद्ध प्रारंभ होते हैं जो 16 दिन तक चलते हैं। इस साल 20 सितंबर से श्राद्ध प्रारंभ हो रहे हैं जो छह अक्तूबर बुधवार तक समाप्त होंगे। श्राद्ध पत्र को पितृ पक्ष के नाम से भी जाना जाता है। श्राद्ध शब्द श्रद्धा से बना है जिसका अर्थ है पितरों के प्रति श्रद्धा भाव। कहा कि पितृ पक्ष यानि श्राद्ध पक्ष को लेकर अधिकतर लोगों में भ्रम बना हुआ है कि यह समय अशुभ होता है। श्राद्ध पक्ष में कोई भी नई चीज नहीं खरीदनी चाहिए, लेकिन किसी भी ग्रंथ में इसका उल्लेख नहीं है कि श्राद्ध पक्ष में खरीदारी नहीं करनी चाहिए। पुराणों और ग्रंथों में सिर्फ पितरों के लिए श्रद्धा की बात कही गई है। ग्रंथों में बताया गया है कि पूरे साल खरीदारी की जा सकती है। इसके लिए मुहूर्त भी दिए गए हैं।
पंडित ललित शर्मा के अनुसार सिर्फ मृत्यु सूतक में ही शुभ कार्यों के लिए खरीदारी नहीं की जा सकती है। कई लोगों का मानना है कि श्राद्ध पक्ष में घर गाड़ी, नए कपड़े, जमीन, सोना-चांदी आदि की खरीदारी करने से दोष लगता है या पितृ नाराज हो जाते हैं, जो आधारहीन हैं। नए चीज खरीदने या घर की समृद्धि होने से पितर प्रसन्न होते हैं। श्राद्ध पक्ष अन्य दिनों की तरह शुभ माने जाते हैं, क्योंकि इस दिन पितर हमारे घर आते हैं। श्राद्ध करके उनका आशीर्वाद लेना चाहिए। 16 दिनों तक चलने वाले श्राद्ध पक्ष में केवल मांगलिक कार्य करना जैसे विवाह, उपनयन संस्कार, नींव पूजन, मुंडन, गृह प्रवेश आदि को अशुभ माना गया है। श्राद्ध पक्ष को अशुभ नहीं मानना चाहिए क्योंकि इसकी शुरूआत में ही भगवान गणेश की पूजा होती है और इसके बाद ही नवरात्र आते हैं। जब श्राद्ध पक्ष के प्रारंभ में भगवान गणेश का पूजन होता है और बाद में मां दुर्गा का पूजन तो ये अशुभ कैसे हो सकते हैं।