साहित्यकार कमलेश्वर का लिखा शुभकामना संदेश दिखाते मनोज त्यागी।
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साहित्यकार कमलेश्वर का बिजनौर से रहा गहरा नाता
बिजनौर। साहित्यकार कमलेश्वर की बुधवार को पुण्यतिथि मनाई गई, 27 जनवरी 2007 को उनका निधन हुआ। हिंदी साहित्य में नई कहानी के पैरोकार कहे जाने वाले कमलेश्वर का जनपद बिजनौर से गहरा नाता रहा। वह दर्जनों बार बिजनौर आए और यहां के लोगों के लिए उनके मन में बेहद सम्मान रहता था।
कमलेश्वर का जन्म 6 जनवरी 1932 को मैनपुरी में हुआ था। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक करने के दौरान उनकी दोस्ती गजलकार दुष्यंत कुमार से हुई। दुष्यंत कुमार बिजनौर के राजपुर नवादा के रहने वाले थे। बाद में कमलेश्वर और दुष्यंत कुमार रूम मेट भी रहे। दुष्यंत कुमार से दोस्ती के बाद वह खूब बिजनौर आते थे। दुष्यंत की माता रामकिशोरी देवी को वह अम्मा कहते थे और उनके हाथ के बने खाने का स्वाद वह जीवन भर नहीं भूले। बाद में कमलेश्वर की पुत्री ममता का विवाह दुष्यंत कुमार के पुत्र आलोक त्यागी के साथ हुआ। आलोक त्यागी बताते हैं कि उनका विवाह ‘लव मैरिज विद द डिफरेंस’ कहा जा सकता है, क्योंकि शादी से पहले हम दोनों में कोई प्रेम संबंध नहीं थे, लेकिन हमारे दोनों के पिता के मैत्रिक संबंध बेहद प्रगाढ़ थे। आलोक त्यागी बताते हैं कि शादी के बाद मेरे पुत्र के जन्मदिवस पर कमलेश्वर जी गांव आए थे और कई दिन रुके थे।
वरिष्ठ साहित्यकार एवं दुष्यंत कुमार के भतीजे मनोज त्यागी बताते हैं कि कमलेश्वर जी के मन में बिजनौर के लोगों के लिए बेहद सम्मान था। एक बार वह कमलेश्वर जी से मिलने उनके आवास पर दिल्ली गए थे। उस दौरान कमलेश्वर जी ‘चंद्रकांता’ धारावाहिक की पटकथा लिख रहे थे। मनोज त्यागी के पास आज भी कमलेश्वर जी द्वारा हस्ताक्षरित शुभकामना संदेश सुरक्षित है। कमलेश्वर को उनके उपन्यास ‘कितने पाकिस्तान’ के लिए 2003 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। पद्म भूषण से सम्मानित किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने आंधी, राम बलराम, मौसम, मिस्टर नटवरलाल, लैला, सौतन, सौतन की बेटी सहित लगभग 100 फिल्मों की पटकथा लिखी तथा वह दूरदर्शन के महानिदेशक भी रहे।