नजीबाबाद। महिला आयोग की सदस्य संगीता अग्रवाल के पति और बेटे को हत्याकांड में उम्र कैद की सजा होने से उनके राजनीतिक कॅरिअर पर फैसले की आंच आई है। महिला आयोग की सदस्य भाजपा स्थानीय स्तर पर राजनीति में कई महीनों से सक्रिय थीं। उनके राजनीतिक कॅरिअर को लेकर चर्चाएं तेज हो गई है
बहुत चर्चित प्रबल हत्याकांड के फैसले में महिला आयोग की सदस्य संगीता जैन अग्रवाल के प्रति विनय अग्रवाल पुत्र अपूर्व अग्रवाल सहित सात को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है। महिला आयोग की सदस्य पिछले करीब एक वर्ष से नजीबाबाद की भाजपा राजनीति में सक्रिय होकर पांव जमा रहीं थीं। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में बतौर महिला आयोग के सदस्य कई बार उन्होंने जनसुनवाई के कार्यक्रम आयोजित किए। क्षेत्र के कार्यक्रमों में भी अनेक बार प्रतिभा किया।
हाल ही में नगर पालिका परिषद के सदस्यों द्वारा बोर्ड की मीटिंग में बहिष्कार के दौरान भी संगीता अग्रवाल ने प्रदर्शनकारी बोर्ड सदस्यों को समर्थन दिया था। संगीता अग्रवाल विधानसभा की नजीबाबाद सीट के लिए भाजपा से टिकट मिलने की संभावना को तलाशते हुए चुनाव लड़ने का मूड बना रहीं थीं।
विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के अन्य टिकट के दावेदारों में भाजपा के टिकट पर दो बार चुनाव लड़ चुके राजीव अग्रवाल, भाजपा की पूर्व क्षेत्रीय मंत्री लीना सिंघल, ब्लॉक प्रमुख तपराज सिंह, शुभम अग्रवाल उर्फ लवी प्रमुख हैं। विक्रम सिंह खोबे और अवनीश अग्रवाल टांडेवाले भाजपा टिकट के अन्य दावेदारों में शामिल हैं।