बिजनौर। पॉक्सो एक्ट की विशेष न्यायाधीश कल्पना पांडेय ने नाबालिग बेटी को ढाल बनाकर छेड़छाड़ का केस दर्ज करने वाली महिला को तीन महीने कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही एक हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। झूठी गवाही देने और पक्ष द्रोही होने की वजह से अदालत ने यह निर्णय लिया। नहटौर थाना क्षेत्र के गांव डूंडाखेड़ी निवासी एक महिला ने न्यायालय में धारा 156 के तहत प्रार्थना पत्र दिया था। जिसमें कहा गया कि उसकी बेटी की उम्र 16 वर्ष है। जिसके साथ गांव का ही प्रदीप कुमार बीते एक साल से छेड़छाड़ करता चला आ रहा है। कहा कि 8 सितंबर 2020 की शाम 6:00 बजे उसकी नाबालिग बेटी पशुओं का गोबर कूड़ी पर डालकर घर लौट रही थी तभी आरोपी प्रदीप ने छेड़खानी की और अश्लील फब्तियां कसी। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज नहीं की।
कोर्ट ने परिवाद के रूप में दर्ज किया। मामले की सुनवाई में महिला ने बयान बदल दिए और छेड़खानी के आरोप से भी इनकार किया। महिला ने स्वीकार किया तीनों मुलजिम सगे भाई हैं तथा उनके परिवार वालों से उसका पहले से ही दीवानी एवं फौजदारी का वाद था। गांव वालों ने मामले में फैसला करा दिया है। पॉक्सो एक्ट का गलत इस्तेमाल करने के मामले में अदालत ने सजा सुनाई है।