तंजील हत्याकांड में गवाहों ने दर्ज कराए बयान
बिजनौर। सहसपुर में हुए एनआईए के डिप्टी एसपी तंजील अहमद व उनकी पत्नी फरजाना हत्याकांड में बृहस्पतिवार को मुनीर व उसके साथी अपर जिला एवं सत्र न्यायधीश कोर्ट नंबर तीन चंपत सिंह की अदालत में पेश हुए। इस मामले की सुनवाई में अब तेजी आई है। इस दोहरे हत्याकांड में बृहस्पतिवार को सेवानिवृत्त हेड मोहर्रिर की गवाही हुई। उससे पूर्व तंजील अहमद के भाई रागिब मसूद तथा इस घटना के चश्मदीद गवाह मोहम्मद हसीब अहमद तथा इनामुल हक की पूर्व में गवाही हो चुकी है। तंजील अहमद के भाई रागिब मसूद व मोहम्मद हसीब अहमद ने जहां अपने बयानों में दोहरे हत्याकांड की पुष्टि करते हुए स्वयं द्वारा घटना देखे जाने की बात कही है। वहीं, गवाह इनामुल हक पक्ष द्रोही हो गया और उसने इस घटना को देखे जाने से इंकार कर दिया। इस मामले में अब अगली सुनवाई छह अक्तूबर को होगी।
सीएए प्रकरण: आख्या न मिलने पर 27 सितंबर को होगी सुनवाई
बिजनौर। दिसंबर 2019 में सीएए के विरोध में नहटौर में हुए बवाल के दौरान एक युवक की मौत के मामले में पूर्व एसपी सहित सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने को दिए गए प्रार्थना पत्र पर अब 27 सितंबर को सुनवाई होगी। सीजेएम विमल त्रिपाठी ने इस मामले में एसपी बिजनौर से आख्या मंगाई थी जो अभी तक न्यायालय को नहीं मिली है। सीजेएम ने पत्र लिखकर एसपी से इस मामले में अपनी आख्या देने को कहा है। नहटौर के चरखी नौधा निवासी शुऐब की ओर से सीजेएम न्यायालय में धारा 156/3 के तहत प्रार्थना पत्र दिया गया है जिसमें शुऐब ने तत्कालीन एसपी संजीव त्यागी, तत्कालीन थाना प्रभारी राजेश सोलंकी, चौकी प्रभारी आशीष तोमर, पुलिस कांस्टेबल मोहित, तीन अज्ञात पुलिसकर्मियों की उसके भाई सुलेमान की सीएए प्रदर्शन के दौरान हत्या का आरोप लगाया था। प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि उसका भाई नमाज पढ़कर मस्जिद से घर आ रहा था। उसे पुलिस कर्मियों ने षड्यंत्र पूर्वक गोली मारकर हत्या कर दी। सुलेमान की मौत का मामला बहुत तूल पकड़ा था। कई नेता भी सुलेमान के घर गए थे और पुलिस पर सुलेमान की हत्या का आरोप लगाया था।