वन्यजीव संरक्षण की मुहिम लाई रंग, बाघों का बढ़ा कुनबा
कालागढ़। कालागढ़ क्षेत्र में वन एवं वन्यजीवों के संरक्षण के लिए चलाई जा रही मुहिम वन्यजीवों के लिए खुशहाली लेकर आई है। वनों में बाघिन चार शावकों के साथ देखी जा रही है। कार्बेट टाइगर रिजर्व के वन एवं वन्यजीवों के संरक्षण के लिए 1960 के दशक से ही काम किया जा रहा है। 1973 में कार्बेट टाइगर रिजर्व के वनों में कालागढ़ में ही रॉयल बंगाल टाइगर के बच्चे छोड़े गए थे। 1973 से वन संरक्षण अधिनियम के तहत वन एवं वन्यजीवों का संरक्षण शुरू कर दिया गया था।
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1980 पारित हो जाने के बाद कालागढ़ क्षेत्र में वन्यजीवों के संरक्षण के लिए जोर दिया गया। क्षेत्र में औद्योगिक इकाइयां स्थापित न हो सकीं, जिसके चलते यह क्षेत्र शुद्ध पर्यावरण का क्षेत्र बना रहा। कार्बेट टाइगर रिजर्व के वनों के बीच से होकर बह रही राम गंगा नदी वनों एवं वन्यजीवों के लिए प्राण दायिनी या लाइफ लाइन कही जा सकती है। दूसरी ओर शिवालिक पर्वत मालाओं की घाटी का आंचल वन्यजीवों की अठखेलियों का स्वच्छंद प्राकृतिक वास बना है। नदी के जल में जहां वनों को हरियाली, जमीन को नमी प्रदान की, वहीं वन्यजीवों को पर्याप्त जल जंगल में ही मिल गया। स्वच्छ पर्यावरण एवं निर्मल जल के बीच वन्यजीवों की दुनिया खुशहाल हो गई। कालागढ़ में इन दिनों एक बाघिन चार शावकों के साथ देखी जा रही है। दूसरी ओर कार्बेट टाइगर रिजर्व के वनों में एक दूसरी बाघिन भी चार शावकों के साथ दिखाई दी है। चार-चार शावकों के साथ बाघिन दिखाई देने को वन विभाग बहुत ही अच्छा लक्षण मान रहा है। वन्यजीवों के संरक्षण में यह एक बड़ी बात है। अक्सर बाघिन के शावकों में से एक या दो ही शावक जीवित बच पाते थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़ रही है।
आने वाले समय में और बेहतर परिणाम मिलेंगे
कालागढ़ के उप प्रभागीय वन अधिकारी एवं कार्बेट टाइगर रिजर्व के पार्क वार्डन रमाकांत तिवारी ने बताया कि चार-चार शावकों के साथ बाघिन का दिखाई देना उनके जीवन व्यवहार में परिवर्तन को दर्शाता है। अब बाघ शावकों पर हमला कर उनको नुकसान नहीं पहुंचा रहे हैं। वनों में उनके लिए पर्याप्त भोजन मौजूद है। शाकाहारी जीवों पर ही वह अब निर्भर होते नजर आ रहे हैं। वह अपनी प्रजाति का शिकार नहीं कर रहे हैं। आने वाले समय में होने वाली गणना में वन्यजीवों के परिवारों के अच्छे परिणाम मिलेंगे।
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231 बाघ दर्ज हैं गणना में
कार्बेट टाइगर रिजर्व के वनों में बाघों की बड़ी संख्या है। मार्क वार्डन का कहना है की 2018 में जो गणना की गई थी उस में बाघों की संख्या 231 थी। उससे पूर्व की गणना में 214 बाघ दर्ज हो पाए थे। हालांकि कार्बेट लैंडस्केप (आसपास का वन क्षेत्र) में यह संख्या 250 से भी अधिक हो गई थी। बाघों के मामले में कालागढ़ के जंगल किसी परिचय के मोहताज नहीं है। नई गणना में इस बार अच्छे परिणाम आने की संभावना है।