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जहां आबाद थे गांव, वहां बह रही गंगा की धारा

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बिजनौर के ग्राम सीमला कलां में 2013 में बाढ़ के डर से अपने मकान खुद तोड़ती महिला। (फाइल फोटा) - फोटो : BIJNOR
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जहां आबाद थे गांव, वहां बह रही गंगा की धारा
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बिजनौर। जहां कभी आबाद गांव होते थे, चौपाल लगती थी, आज वहां गंगा की तेज धारा बह रही है। ऐसा होने में एक या दो साल नहीं लगा, बल्कि 56 सालों का गंगा का इतिहास देखें तो बिजनौर के करीब 23 गांव गंगा के रौद्र रूप का शिकार हो चुके हैं। ये ऐसे गांव हैं, जिनका नामों निशान तक मिट चुका है। पिछले कुछ सालों से तटबंध और गंगा के दूसरी ओर रुख करने से तटीय गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन अब फिर से कटान शुरू होने से लोगों की धड़कने बढ़ गई है।
जिले में गंगा सबसे ज्यादा बिजनौर और चांदपुर में ही तबाही मचाती थी। हर साल जून महीने में या मानसूनी बारिश के दौरान लोगों को बाढ़ का सामना करना पड़ता है। इस बार भी नांगलसोती, रावली, ब्रह्मपुरी, जलीलपुर क्षेत्र के कई गांवों में पानी भर चुका है। घर, मंदिर, स्कूल तमाम ऐसी जगह है, जहां पानी भर चुका है। प्रशासन लोगों के स्कूल में रहने की व्यवस्था भी करा चुका है। जलस्तर घटते ही गंगा ने आबादी और खेतों में कटान शुरू कर दिया है। करीब सात साल पहले जून में ही जिले दो गांव सीमलाकलां और फतेहपुर सभाचंद गंगा में समा गए थे।
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सुक्खापुर डूब गया तो डीएम ने बसाया था माकेंडपुरम
साल 1957 में चांदपुर तहसील का गांव नांदनौर गंगा में बह गया था। इस गांव को खानपुर में आबाद किया गया था। इसके बाद चांदपुर तहसील के गांव जाफराबाद और जहांगीरपुर गांव भी गंगा में जलसमाधि ले चुके थे। इसके बाद वर्ष 1964 में आई गंगा की बाढ़ में विदुरकुटी के सामने आबाद गांव भुआ, बेला, शेरपुर, लीलावली, हरिपुर, श्रीजीपुर, गांवड़ी, खेड़ा, धूधली खादर गंगा में डूब गए थे। पिछले दो दशकों की बात करें तो बिजनौर तहसील के ही गांव मतवाली, सौपुरी, भगवतीपुर, इच्छावाला, मुर्शदाबाद, मोहनपुर भी गंगा की तेज धारा में बह गए। भगवतीपुर, इंच्छावाला, मुर्शदाबाद आदि आधा दर्जन गांव धारा के उस पार चले गए और अब गैर आबाद हैं। साल 2001 में भी जनपद का गांव सुक्खापुर भी पानी में बह गया। तत्कालीन डीएम ने सुक्खापुर के ग्रामीणों को नए स्थान पर बसाया, तो ग्रामीणों ने गांव का नाम भी डीएम के नाम पर ‘माकेंडपुरम’ रखा था।
जिले में हर साल रौद्र रूप धारण करती है ये नदियां
जिले में यूं तो गंगा की बाढ़ ही सबसे ज्यादा खतरनाक मानी जाती है, लेकिन गंगा के अलावा मालन, खो, गागन, रामगंगा, बनौली, रतनाल, कोटावाली, ऊनी, नकटा, गूला, फीका, धारा, पीली, लकड़ियान और बान नदी में भी हर साल जून में मानसूनी बारिश के दौरान जलस्तर बढ़ जाता है।
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जो भी गांव गंगा किनारे हैं, वहां पर अलर्ट कर दिया गया है। पूरी कार्ययोजना देखी जा रही है कि किस तरह बाढ़ से बचाव किया जा सकता है। मैं स्वयं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहा हूं। जिन गांवों में बाढ़ का खतरा है, उनके लिए स्कूलों व अन्य जगहों पर आश्रय स्थल भी बनवाए गए हैं - उमेश मिश्रा, डीएम।
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