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‘गांव में पराली व पत्ती जली तो प्रधान जिम्मेदार’

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कासमपुरगढ़ी (बिजनौर)। बढ़ते वायु प्रदूषण पर एनजीटी के कड़ा रुख अपनाने के बाद प्रदूषण रोकथाम को अधिकारी हरकत में आ गए हैं। डीएम के आदेश पर कासमपुरगढ़ी ब्लॉक के सभागार में प्रधानों एवं पंचायत सचिवों की बैठक हुई।
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बैठक को संबोधित करते हुए बीडीओ अंबरीश कुमार ने वायु प्रदूषण रोकने को उच्च अधिकारियों के आदेशों की विस्तार से जानकारी दी। कहा कि जिस पंचायत में पराली अथवा फसल के अवशेष जलाए गए उस पंचायत का प्रधान व सचिव जिम्मेदार होगा। किसान के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया पराली अथवा फसलों के अवशेष जलाने पर 2 एकड़ तक भूमि वाले किसान पर ढाई हजार रुपये, इससे अधिक अथवा पांच एकड़ तक भूमि वाले किसान पर 5 हजार रुपये एवं 5 एकड़ से अधिक भूमि वाले किसान को 15 हजार रुपये का अर्थदंड दिए जाने के साथ-साथ उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी, जिसमें गिरफ्तारी भी की जा सकती है। प्रधानों को अपनी अपनी पंचायत में मुनादी व अलाउंस के माध्यम से किसानों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए। वहीं, प्रधान संघ अध्यक्ष का कहना था कि प्रदूषण एक समस्या है। लेकिन पराली व गन्ने की पत्ती को किसान कहा ले जाये और वह गेहूं की बुवाई कैसे करें। सरकार को किसानों की समस्या का भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने पराली व पत्ती से जैविक विधि से जैविक खाद बनाने पर जोर दिया। सरकार के इस ओर कदम बढ़ाने की मांग की। बैठक को एडीओ पंचायत अजमल हुसैन, एडीओ गौरव कुमार, एडीओ बृजेश कुमार ने भी संबोधित किया। बैठक में मेघनाथ सिंह, अशोक कुमार, रामनाथ सिंह, इस्लामुद्दीन, हरवंश सिंह, कल्लू सिंह आदि ग्राम प्रधान रहे।
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