नजीबाबाद। मोहर्रम का चांद नजर आते ही जोगीरम्पुरी सहित शिया बाहुल्य क्षेत्रों में इमामबाड़े सजने शुरू हो गए। हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की दीन और इस्लाम को बचाने के लिए दी गईं कुर्बानियों को नम आंखों से याद करने का सिलसिला शुरू हुआ।
मोहर्रम का चांद नजर आते ही माहौल गमगीन हो गया है। दसवीं तारीख को मुहर्रम मनाया जाएगा। जोगीरम्पुरी के सभी इमामबाड़े चांद दिखाई देते ही सज गए और मातमी मजलिसों का सिलसिला शुरू हो गया। जोगीरम्पुरी सादात में इमामबाड़ा दरबारे हुसैनी, जोगीपुरा में इमामबाड़ा हैदरी, इमामबाड़ा अबुतालिब, इमामबाड़ा काजमिया, इमामबाड़ा जैनबिया में देर रात तक नोहा, मजलिसों और मातमों का सिलसिला जारी रहा।
इमामबाड़ा दरबारे हुसैनी में मौलाना गौहर अली रिजवी ने मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि कर्बला में इमाम हुसैन की कुर्बानी का मकसद जुल्म के खिलाफ खड़े होने से है भले ही तुम अकेले ही क्यों न रह जाओ। उन्होंने कहा कर्बला की जंग ने दुनिया को यही पैगाम दिया है। हजरत इमाम हुसैन ने दीन और इस्लाम की हिफाजत के लिए अपना पूरा घर कुर्बान कर दिया।
मजलिस से पहले जमाल अहमद, जिया अब्बास, कुदरत हुसैन, रहबर अब्बास और साथियों ने मर्सिया ख्वानी की। हसन अब्बास, वाजिद रजा, साजिद रजा नोहा ख्वानी की। सोगवारों ने हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद में सीनाजनी कर मातम का इजहार किया।