फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिले में 189 हुई खांडसारी इकाइयाें की संख्या

विज्ञापन
विज्ञापन
जिले में 189 हुई खांडसारी इकाइयाें की संख्या
विज्ञापन

बिजनौर। शासन का खांडसारी लाइसेंस सरलीकरण का असर दिखाई देने लगा है, अब खांडसारी व्यापारी लाइसेंस बनवाने में दिलचस्पी ले रहे हैं। चालू पेराई सत्र में 59 लाइसेंस बन गए हैं। इस प्रकार जिले में कुल लाइसेंस वाली खांडसारी इकाइयों की संख्या 189 हो गई है। जो पिछले पेराई सत्र से करीब 20 अधिक हैं।
पहले खांडसारी इकाइयों का लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया जटिल थी। व्यापारियों को लखनऊ के चक्कर काटने पड़ते थे। परंतु दो साल पहले लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया का सरलीकरण कर दिया गया। शासन ने सारी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी। जिससे व्यापारियों को लाइसेंस घर बैठे मिलने लगा है। बिजनौर परिक्षेत्र में पेराई सत्र 2020-21 में 170 इकाइयां चली थीं। इकाइयों को गन्ना खूब मिला। गुड़ के भाव भी फलदाई रहे। इकाइयां व्यापारियों के लिए फायदे का सौदा रही। लिहाजा लाइसेंस सरलीकरण का असर इस पेराई सत्र में दिखाई दे रहा है। व्यापारियों का नए लाइसेंस बनवाने में रुझान बढ़ा है। सहायक चीनी आयुक्त डीपी मौर्य ने बताया कि सात नवंबर तक पेराई सत्र 2021-22 के लिए 59 नए लाइसेंस बन गए हैं। इनमें 18 इकाइयों ने पेराई शुरू कर दी है। बाकी अगले सप्ताह तक चल जाएगी। सभी इकाइयां गुड़ बना रही हैं।
विज्ञापन

हो रही है अधिक पेराई
सहायक चीनी आयुक्त डीपी मौर्य ने बताया कि इस साल इकाइयों की संख्या बढ़ी है। पेराई सत्र 2020-21 में कुल लाइसेंस धारक इकाई 170 थीं। इनमें खांडसारी बनाने वाली मात्र दो तथा गुड़ बनाने वाली 168 इकाइयां थीं। कुल 61 इकाइयां चली थीं। चालू सत्र में सात नवंबर तक लाइसेंस धारक इकाई 189 हो गई हैं। 50 गुड़ बनाने वाली इकाई चल गई हैं। बाकी चलने को तैयार हैं। पिछले पूरे सत्र में कुल 05.59 लाख क्विंटल गन्ना पेरा गया था। इस सत्र में अब तक 02.35 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई हो चुकी है।
विज्ञापन

जिले में बने गुड़ की मांग अधिक
जिले में बना गुड़ देश विदेश में खूब धूम मचा रहा है। लखनऊ में आयोजित गुड़ महोत्सव में भी जिले के गुड़ ने नाम कमाया था। जिले में बने गुड़ की दिल्ली, बिहार, गुजरात पंजाब, बंगाल, राजस्थान आदि राज्यों में जबरदस्त मांग है। गैर राज्य के व्यापारी यहां के गुड़ निर्माताओं से संपर्क करने लगे हैं। जिले में बना जैविक गुड़ विदेशियों को भा रहा है। जिले में जैविक गुड़ बनाने की शुरूआत आईआईटी दिल्ली के पूर्व प्रोफेसर तथा प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. यशपाल सत्य ने की थी। उनके भाई शूरवीर सिंह निवासी ग्राम चांदा नंगली ब्लॉक हल्दौर बताते हैं कि जैविक गुड़ की मांग लगातार बढ़ रही है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें