फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महफिल-ए-मसालमा के साथ हुआ मातमी मजलिसों का समापन

विज्ञापन
नजीबाबाद के जोगीरम्पुरी दरगाह पर मजलिसों के समापन पर महफिल-ए-मसालमा में कलाम पढ़ते शायर। - फोटो : NAZIBABAD
विज्ञापन
महफिल-ए-मसालमा के साथ हुआ मातमी मजलिसों का समापन
विज्ञापन

नजीबाबाद। जोगीरम्पुरी दरगाह पर मुनक्किद चार रोजा सालाना मजलिसें महफिल-ए-मसालमा के साथ संपन्न हुईं। शायरों ने मौला अली की शान में कलाम पेश किया।
महफिल-ए-मसालमा का आगाज शायर शहंशाह बिजनौरी के कलाम वार कैसा भी हो बेकार नहीं जाता से हुआ। सादिक सिबतैन अमरोहवी का कलाम फिरदौस का निशान है मेरे अली का दर.., दानिश गदीरी का कलाम घर बैठे ही फिरदौस का दीदार किया करते हैं हम.., मंजर जैदी का कलाम खतरा किसी का है न कोई दर किसी का है, शायद वजूद ये नादे अली का है.. कलाम पेश कर जायरीनों को दाद देने पर मजबूर कर दिया।
महफिल-ए-मसालमा में अनेक शायरों ने अपने कलाम के जरिए हजरत इमाम हुसैन के किरदार को बयां किया। प्रशासक डॉ. हबीब हैदर ने दरगाह की जियारत करने आए जायरीनों का शुक्रिया अदा किया। नसीमुल बाकरी के संचालन में आयोजित महफिल-ए-मसालमा में शम्स तबरेज, दानिश सिरसवी, अली नवाज सहित अनेक शायरों ने हजरत अली और उनके साथियों के किरदार पर रोशनी डाली। महफिल-ए-मसालमा के समापन पर दुनिया में अमनो-अमान की दुआ की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

देर रात तक की जियारत, मांगी मन्नतें
महफिल-ए-मसालमा के दौरान दरगाह परिसर में दरगाह की जियारत करने और मन्नतें मांगने का सिलसिला रविवार की देर रात तक जारी रहा। दरगाह की जियारत करने आए बड़ी संख्या में जायरीन दरगाह परिसर में स्थित पानी के चश्मे का पानी बतौर तवर्ररुख ले जाने के लिए बेचैन नजर आए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें