बिजनौर में फुटबाल पोल के गिरने से हुई खिलाड़ी की मौत के मामले में स्टेडियम प्रबंधन की लापरवाही सामने आ रही है। सवाल यह भी है कि फुटबाल गोल पोस्ट को उखाड़ने के बाद क्रिकेट पिच के पास क्यों रख दिया गया। इन दिनों फुटबाल बंद है लेकिन क्रिकेट के मैच तो खेले जा रहे है। स्टेडियम में दूसरे खेल कूद भी चलते रहते हैं, ऐसे में पोल को मैदान में रखना बड़ी लापरवाही है। खिलाड़ियों को चोट लगने की स्थिति प्राथमिक उपचार की व्यवस्था तक स्टेडियम में नहीं थी।
स्टेडियम में रनिंग, क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी के लिए एक ही मैदान हैं। स्टेडियम में रनिंग ट्रैक पर दौड़ते समय जिस फुटबॉल गोल पोस्ट के गिरने से वंश की मौत हुई, उसमें काफी वजन है। यह गोल पोस्ट क्रिकेट पिच के पास रखा रहता है। खिलाड़ी इसे कभी-कभी हटा भी देते हैं। गोल पोस्ट को गाड़ने के लिए गाड़ने वाली बड़ी कील भी ऐसे ही पड़ी रहती हैं। न तो सीनियर खिलाड़ियों ने इस पर ध्यान दिया और न ही स्टेडियम के कर्मचारियों ने कभी उन्हें ऐसा करने के लिए रोका। नेशनल हाइवे पर जाम लगा रहे खिलाड़ियों ने बताया कि गोल पोस्ट के पोल नीचे से गलने लगे थे। गोल पोस्ट कभी भी अपने आप ही गिर जाता था। वे खुद गोल पोस्ट को खड़ा करते थे। गोल पोस्ट की मरम्मत के लिए कई बार स्टेडियम के अधिकारियों को बताया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। शहर कोतवाल फतेह सिंह के मुताबिक इस मामले में वंश के पिता पवन की ओर से नेहरू स्टेडियम के मैदान की देखरेख करने वाले अफसरों व कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इससे पहले स्टेडियम में फुटबॉल गोल पोस्ट गिरने से घायल हुए वंश की मौत से आक्रोशित खिलािड़यों ने उसके शव को स्टेडियम के सामने लाकर जाम लगा दिया। सड़क पर खिलाड़ियों ने अपनी साइकिल बिछा दीं।करीब पांच बजे से छह बजे तक स्टेडियम के बाहर जाम लगा रहा। मुआवजे की घोषणा, एसडीएम वीके सिंह व भाजपा विधायक सुचि चौधरी के ससुर के आश्वासन पर जाम खोला गया।
पांच लाख रुपये मुआवजे की घोषणा
वंश के परिजनों को जिला खेलकूद प्रोत्साहन समिति की ओर से पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। एसडीएम वीके सिंह ने इसकी घोषणा कर दी है। जिला खेलकूद प्रोत्साहन समिति हर जिले में बनी होती है। डीएम इस समिति के अध्यक्ष व क्रीड़ा अधिकारी सचिव होते हैं।
कबड्डी का बड़ा खिलाड़ी बनना चाहता था वंश
हादसे में मरे वंश के एक भाई व एक बहन हैं। उसके पिता एक व्यवसायी के यहां नौकरी करते हैं। अरुण आरजेपी इंटर कॉलेज में कक्षा आठ में पढ़ता था। प्रो कबड्डी लीग में जिले के खिलाड़ियों राहुल, रोहित, बिलाल आदि के खेलने से जिले में भी कबड्डी के प्रति खिलाड़ियों में उत्साह है। युवा खिलाड़ी कबड्डी के प्रति आकर्षित हो रहे हैं। वंश भी इन खिलाड़ियों में से एक था। वह कबड्डी में बड़ा कबड्डी खिलाड़ी बनने का सपना संजोए स्टेडियम जाता था।
केवल तैराकी कोच की है नियुिक्त
स्टेडियम में खिलाड़ियों की हर गतिविधि पर नजर रखने व मैदान में कमियों को दूर करने के लिए कोच की मुख्य भूमिका होती है। स्टेडियम में वर्तमान में केवल तैराकी के ही एकमात्र कोच नियुक्त हैं। बाकी खेलों के कोच संविदा पर नियुक्त किए जाते हैं। जनवरी में इन कोच की संविदा समाप्त हो गई थी। फिर भी ये कोच खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए स्टेडियम आते रहते हैं।
30 साल पहले भी एक कर्मी की हुई थी मौत
बिजनौर। वंश की मौत से तीन दशक बाद नेहरू स्पोर्ट्स स्टेडियम फिर से दागदार हुआ है। करीब तीन दशक पहले भाला घुसने से एक कर्मचारी की मौत हो गई थी। शुक्रवार को हुए हादसे ने एक बार फिर से सभी को झकझोर दिया है।
नेहरू स्पोर्ट्स स्टेडियम सन 1962 में बना था। यहां पर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई खिलाड़ी तैयार हुए। एक समय में हॉकी की कई देशों की टीम भी स्टेडियम में खेलने के लिए आया करती थीं। स्टेडियम के करीब छह दशक के समय में दो बार यहां पर जान जाने का कलंक लगा है। शुक्रवार को स्टेडियम में दौड़ते हुए कबड्डी खिलाड़ी वंश की सिर पर फुटबॉल गोल पोस्ट गिरने से मौत हो गई। इस घटना ने सभी को झकझोर दिया है। कई साल पहले भी स्टेडियम में हुए एक हादसे में एक संविदा कर्मचारी की मौत हो गई थी। 30 साल से भी पहले कुछ खिलाड़ी स्टेडियम में भाला फेंकने की प्रैक्टिस कर रहे थे।
स्टेडियम में एक संविदा कर्मचारी मैदान पर घास कटाई कर रहा था। खिलाड़ी उस कर्मचारी की दिशा में ही भाला फेंक रहे थे। एक खिलाड़ी द्वारा फेंका गया भाला उस कर्मचारी के सीने में जा धंसा था। उस खिलाड़ी ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था। उसके बाद ऐसे खेलों के लिए काफी एहतियात बरती गई।
स्टेडियम में बच्चों की सुरक्षा के प्रति अभिभावक भी आश्वस्त रहते थे, लेकिन शुक्रवार को हुई वंश की मौत ने फिर से सभी को झकझोर कर रख दिया है। इस तरह की हादसे में युवा खिलाड़ी की मौत से सभी दुखी है। लोगों का घर में तांता लगा हुआ है।
कराई जा रही है जांच
स्टेडियम के जिला क्रीड़ा अधिकारी को पूर्व में निलंबित कर दिया गया था। स्टेडियम का चार्ज पुलक डे के पास था, वह नेशनल गेम्स में भाग लेने के लिए गए हुए है, चार्ज वह पूर्ण सिंह को देकर गए थे। आज अवकाश का दिन था। पोल हवा में गिरा या किसी अन्य वजह से इसकी जांच कराई जा रही है। इस पोल को मोडीफाई कराया गया था। यह किसने कराया, किसने उसे क्रिकेट पिच के पास रखवाया हुआ था। सुरक्षा का ध्यान क्यों नहीं रखा गया, इन बिंदुओं पर जांच कराई जा रही हैै। जिला खेलकूद प्रोत्साहन समिति की ओर से परिजनों को पांच लाख की आर्थिक मदद की जा रही है। -विजय कुमार, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी मुरादाबाद