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जिले में प्रदूषण फैलाने वालों की तैयार हो रही कुंडली

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बिजनौर के ग्राम स्वाहेड़ी में खेत में डाला जा रहा केमिकल युक्त पानी। - फोटो : BIJNOR
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जिले में प्रदूषण फैलाने वालों की तैयार हो रही कुंडली
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बिजनौर। साफ सुथरे वातावरण और स्वच्छ पानी के लिए बिजनौर को जाना जाता था, लेकिन जनपद को प्रदूषण अपनी जद में लेने लगा है। कहीं प्रदूषित पानी से कैंसर हो रहा है तो कहीं कूड़े के ढेर से हवा में दुर्गंध घुल रही है। जिसे लेकर प्रशासन सख्ती बरतने के मूड में है। प्रदूषण फैलाने वालों की कुंडली तैयार हो रही है। एडीएम ने क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी से इस पर रिपोर्ट मांगी है।
एडीएम प्रशासन विनय सिंह ने क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी को तलब किया। उन्होंने जिले में बढ़ते प्रदूषण पर चर्चा ही नहीं की बल्कि निदान के सुझाव और कार्रवाई का ब्योरा भी मांगा है। निर्देश जारी किए गए कि पानी, हवा और धरा को प्रदूषित करने वालों की रिपोर्ट तैयार की जाए। पंद्रह दिन के भीतर रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है, जिससे जल्द से जल्द कार्रवाई भी की जा सके।
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प्रदूषित पानी जमीनों कर रहा बेकार
फैक्टरियों से निकलने पर केमिकल युक्त पानी इन दिनों किसानों के खेतों में डाला जा रहा है। कुछ किसानों को बरगलाकर खेत में पानी उड़ेल जाते हैं तो वहीं जहां लोग जागरूक हैं, वहां रात में फैक्टरियों के टैंकर से पानी डाल रहे हैं। इससे फसल ही बर्बाद नहीं होती बल्कि खेत भी बेकार हो रहे हैं। पिछले दिनों सालमाबाद के एक किसान का गन्ना सूख गया था। बाद में फैक्टरी मालिका ने उक्त किसान को मुआवजा देकर अपना पीछा छुड़ाया। वहीं बांकपुर पमड़ावली में भी एक किसान के गन्ने का खेत सूख गया था। बाद में फैक्टरी मालिक ने उसे भी मुआवजा दिया। अब सवाल यह है कि इस पानी का निस्तारण क्यों नहीं किया जा रहा।
कैंसर ले रहा लोगों की जान
स्वाहेड़ी के खेतों में फैक्टरी से निकला हुआ पानी कई साल से डाला जा रहा था। अब नतीजा ये हुआ कि गांव के नलों का पानी प्रदूषित हो गया। पानी अगर दूध में डाल दिया जाए तो दूध फट जाता है। इस गांव में दो सालों से कैंसर ने पैर पसार लिए हैं। आठ लोगों की मौत कैंसर के चलते डेढ़ साल के अंतराल में हो चुकी है। कैंसर होने लगा तो लोग फैक्टरी से निकलने वाले केमिकल युक्त पानी को लेकर सचेत हो गए हैं।
छोइया पहले से ही है प्रदूषित
छोइया नदी में भी फैक्टरी से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी डाला जाता है, जिसके चलते छोइया किनारे बसे एक दर्जन गांव का पानी पीने लायक नहीं रहा। इन गांव में भी पिछले पांच सालों से लोगों को कैंसर हो रहा है। दो दर्जन से अधिक मौतें छोइया किनारे बसे दर्जनभर गांव में हो चुकी हैं।
शहरों का कूड़ा भी फैला रहा प्रदूषण
जिले में 12 नगर पालिकाएं और छह नगर पंचायत हैं। इनके पास कचड़ा निस्तारण के लिए कोई जरिया नहीं है। किसी एक जगह या सड़कों के किनारे शहरों का कूड़ा ठिकाने लगाया जा रहा है, जिसकी दुर्गंध से हवा प्रदूषित हो रही है, वहीं जमीन में भी प्रदूषण घुल रहा है।
आखिर कहां खप रहा बायो वेस्ट
जिले में 100 से अधिक निजी नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं। यूं तो दावा किया जाता है कि बायोवेस्ट लेने के लिए एक कंपनी की गाड़ी जिले में आती है, लेकिन कितने नर्सिंगहोम उसे बायोवेस्ट दे रहे हैं, यह स्थिति साफ नहीं है। सूत्रों की मानें तो कुछ अस्पताल चोरी छिपे अस्पताल से निकले बायो वेस्ट को पालिका के कूड़े में ही खपा देते हैं। सवाल यह है कि आखिर बायो वेस्ट कहां खप रहा है।
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जिलेभर में कूड़ा निस्तारण, प्रदूषित जल निस्तारण किस तरह हो रहा है, क्या नियम हैं, इन सभी बिंदुओं पर प्रदूषण विभाग से जानकारी मांगी गई है। यदि कहीं गलत हो रहा है तो कार्रवाई की जाएगी।
- विनय सिंह, एडीएम प्रशासन

बिजनौर में छोईया नदी में बहता पानी।- फोटो : BIJNOR

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