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Bijnor News: हाईकोर्ट के आदेश से ग्राम पंचायत के प्रशासकों में बेचैनी

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नजीबाबाद। प्रधान नहीं हो सकते प्रशासक... हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के बाद प्रशासक की भूमिका निभा रहे ग्राम प्रधानों में बेचैनी बढ़ी है। प्रधान पद पर रहते हुए तो इनका कार्यकाल मई में समाप्त हो चुका है मगर अब प्रशासक कब तक रहेंगे, इसे लेकर कयासबाजी चल रही है।
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राष्ट्रीय पंचायती राज संगठन के जिलाध्यक्ष सोमदेव सिंह ने बताया कि वर्ष 2000 में तीन माह के लिए सरकार ने प्रशासक नियुक्त किए थे। तब कुछ संशोधन भी किया गया था। हाईकोर्ट में गठित पिछड़ा वर्ग आयोग ही बताएगा कि चुनाव कब होंगे। प्रशासकों की नियुक्ति पर कोई संकोच नहीं है।
ग्राम पंचायत बाकरपुर के प्रधान ओजेश राजपूत ने बताया कि सरकार को पहले प्रधान को प्रशासक बनाने की जरूरत ही नहीं थी। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव समय पर होते तो समस्या ही नहीं होती। यदि सरकार प्रशासक बनाती भी तो कोर्ट में मजबूत पक्ष रखती, जिससे रोक न लगती। अब सरकार की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।
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ग्राम पंचायत मो. अमीखानपुर के प्रधान सतविंदर सिंह पोप ने बताया कि कई राज्यों में पहले भी प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया जा चुका है। राजस्थान और उत्तराखंड में प्रशासक बनाए गए। एक राज्य में प्रशासक बन सकते हैं तो दूसरे में रोक क्यों? यह सौतेला व्यवहार है। अब चुनाव ही सही विकल्प है।
ग्राम पंचायत जटपुरा खास के प्रधान मो. अली कस्सार ने बताया कि हाईकोर्ट की टिप्पणी से स्थिति स्पष्ट नहीं है। प्रशासक पर रोक का कोई आदेश नहीं है। कोर्ट ने सरकार से शीघ्र त्रिस्तरीय चुनाव कराने को कहा है। 13 जुलाई को सरकार अपना पक्ष रखेगी। कोर्ट का जो आदेश होगा या सरकार जो फैसला लेगी, हम उसके साथ हैं।
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