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‘धैर्य, हौसले और उच्च मनोबल से मिलती है मंजिल’

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संगीता अग्रवाल। - फोटो : NAZIBABAD
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‘धैर्य, हौसले और उच्च मनोबल से मिलती है मंजिल’
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नजीबाबाद। हौसला हो तो इंसान मुश्किल समय को भी आसान बनाते हुए लक्ष्य को पा लेता है। किराना कारोबारी महिला संगीता अग्रवाल ने पति की मृत्यु के बाद स्वयं कारोबार संभाला, अपनी दोनों बेटियों को तकनीकी शिक्षा दिलाकर उनको कामयाब किया।
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कहते हैं कि विपत्ति के समय अगर इंसान धैर्य और साहस का परिचय दे तो उसे मंजिल तक पहुंचने का रास्ता मिल जाता है। नजीबाबाद की बहू संगीता अग्रवाल के पति अनिल कुमार की जनवरी 2002 में बीमारी के चलते मृत्यु हुई थी। किराना कारोबारी परिवार की बहू संगीता पर जब दुखों का पहाड़ टूटा उस समय उनकी दोनों बेटियां आकांक्षा और तृप्ति जूनियर कक्षाओं में पढ़तीं थीं। संगीता कहती हैं कि उनके लिए दोनों बेटियां बेटों से कम नहीं रहीं। बेटियों को पढ़ाने के लिए संगीता ने चुनौतियों का सामना किया। संबंधियों विशेष रूप से मायके वालों का सहयोग मिला और संगीता ने किराना कारोबार की स्वयं कमान संभाली। कारोबार में संबंधी विकास अग्रवाल का लगातार सहयोग मिला। कारोबारी महिला ने पति का साया उठने के बावजूद बड़ी बेटी को एमसीए और छोटी बेटी को बीटेक कराई। दोनों बेटियों का विवाह किया। आज दोनों बेटियां प्राइवेट कंपनियों में अच्छे पदों पर कार्यरत हैं। संगीता कहतीं हैं कि विपत्ति में धैर्य और मनोबल कायम रखना चाहिए तो संकट के बादल खुद ही छंटने लगते हैं।
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