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किसान को कर्ज नहीं, फसल का उचित मूल्य चाहिए

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बिजनौर के राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के जिलाध्यक्ष विनोद कुमार। - फोटो : BIJNOR
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किसान को कर्ज नहीं, फसल का उचित मूल्य चाहिए
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बिजनौर। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार के राहत पैकेज की किसानों व मजदूरों से जुड़ी घोषणाएं कीं। किसानों के लिए वित्तमंत्री ने चार लाख करोड़ के केसीसी लोन देने की घोषणा की। 31 मई तक का केसीसी पर ब्याज माफ करने का भी एलान किया। हालांकि किस महीने से लोन माफ होगा इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। जिले के किसानों पर करीब पांच हजार करोड़ का कर्ज है। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार अगर केवल मई तक का भी ब्याज माफ हुआ तो भी किसानों को ब्याज के करीब 30 करोड़ रुपये बचेंगे। अगर किसी वजह से तीन महीने का ब्याज माफ हुआ तो 90 करोड़ तक का ब्याज माफ होगा।
भाकियू ने युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह का कहना है कि सरकार को किसानों की सीधे कोई मदद करनी चाहिए। किसानों को कर्ज नहीं उनकी फसलों का उचित मूल्य चाहिए। अगर सरकार इतना नहीं कर सकती तो कम से कम गन्ने का भुगतान तो समय से करा ही सकती है। कोरोना काल में जान हथेली पर रखकर खेती करने वाले किसानों के लिए सरकार ने कोई मदद नहीं की है। जिले में मजदूर काफी तादाद में हैं। श्रम विभाग में करीब एक लाख 40 हजार व मनरेगा में करीब ढाई लाख मजदूर पंजीकृत हैं। इसके अलावा लॉकडाउन के दौरान दूसरे प्रदेशों में काम करने वाले करीब 15 हजार मजदूर जिले में आए हैं। सरकार ने मजदूरों की मजदूूरी के अंतर को खत्म करने व फैक्ट्रियों में काम करने वालों को न्यूनतम मजदूरी दिलाने की बात कही है।
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राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन जिलाध्यक्ष विनोद कुमार का कहना है कि किसान तो लंबे समय से मनरेगा को खेती से जोड़कर ही किसान और मजदूर दोनों का भला किया जा सकता है। मजदूरों के लिए सरकार ने अच्छी घोषणा की हैं। सभी को न्यूनतम मजदूूरी तो मिलनी ही चाहिए। लेकिन किसानों के लिए घोषणा में कुछ नहीं है। किसान को अब भी केवल कर्ज देने की ही बात कही जा रही है।

बिजनौर के भाकियू के युवा प्रदेशाध्यक्ष दिगम्बर सिंह।- फोटो : BIJNOR

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