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बिजनौर की बहू थीं दिल्ली की पहली मेयर अरुणा आसफ अली

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बिजनौर की बहू थीं दिल्ली की पहली मेयर अरुणा आसफ अली
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बिजनौर। आज का दिन बिजनौर जिले के महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि 16 जुलाई 1909 को ही स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ीं और क्रांतिकारी भगत सिंह के वकील आसफ अली की पत्नी अरुणा का जन्म हुआ था। महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी तथा भारत रत्न से अलंकृत अरुणा आसफ अली बिजनौर की बहू थीं। वह दिल्ली की पहली मेयर बनी थीं। उनका जन्म 16 जुलाई 1909 को हरियाणा के कालका में हुआ था। वह बंगाली मूल की थीं। युवावस्था में ही वह स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गई थीं।
बिजनौर जिले के इतिहास के जानकार हेमंत कुमार बताते हैं कि उन्होंने स्योहारा में जन्मे तत्कालीन समय में देश के बड़े वकील रहे आसफ अली से विवाह किया था। आसफ अली अरुणा से 23 वर्ष बड़े थे। अरुणा आसफ अली के साथ मिलकर आजादी की लड़ाई में सक्रिय रहीं। सरदार भगत सिंह के मुकदमे में कागजी कार्यवाही आसफ अली ने की थी, इस दौरान अरुणा भी उनके साथ रहीं। 1932 में नमक आंदोलन के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। गांधी और इरविन के समझौते के बाद भी उन्हें रिहा नहीं किया गया था, तब उन्होंने जेल में भूख हड़ताल कर दी थी। जिसके बाद अंग्रेज सरकार ने झुककर उन्हें रिहा किया। उन्होंने दिल्ली की तिहाड़ जेल में भारतीय कैदियों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार के लिए जेल में आंदोलन किया था। जिसके बाद भारतीय कैदियों की दशा में सुधार किया गया था।
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तिरंगा फहराने पर लगा था पांच हजार का जुर्माना
अंग्रेज सरकार ने अरुणा को अंबाला जेल में एकांतवास में भी रखा। 1942 में शुरू हुए भारत छोड़ो आंदोलन में अरुणा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन की अध्यक्षता भी की। मुंबई तत्कालीन बंबई के ग्वालिया टैंक में तिरंगा फहराया था। इस पर नाराज होकर अंग्रेजी सरकार ने अरुणा पर पांच हजार का इनाम भी घोषित किया था। देश की आजादी के बाद सन 1958 में अरुणा आसफ अली दिल्ली की मेयर बनीं। इतिहासकार शकील बिजनौरी ने अपनी पुस्तक ‘तहरीके आजादी जिला बिजनौर’ में अरुणा को बिजनौर की बहू बताया है। अरुणा के पति आसफ अली का जन्म बिजनौर के स्योहारा में हुआ था। इसके बाद उनका परिवार शेरकोट में बस गया था। बाद में आसफ अली के पिता दिल्ली में रहने लगे थे। अरुणा आसफ अली की मृत्यु 29 जुलाई 1996 को दिल्ली में हुई। अरुणा को लेनिन पुरस्कार, जवाहरलाल नेहरू पुरस्कार, पद्म विभूषण तथा मरणोपरांत भारत रत्न प्रदान किया गया।
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