मातृभाषा में शुरू होगी तकनीकी शिक्षा: डॉ. अनिल
बिजनौर। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के स्वप्न को साकार करते हुए तकनीकी शिक्षा में सबसे पहले मातृभाषा में लागू किया जा रहा है। शिक्षा का मतलब समाजोन्मुख शिक्षा होना चाहिए। अंतर्निहित क्षमता को पहचानना और उसे विकसित करना ही शिक्षा का काम होता है। यह बात शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की ओर से आयोजित ऑनलाइन संगोष्ठी में शामिल हुए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के अध्यक्ष डॉ. अनिल सहस्त्रबुद्धे ने कही।
बुधवार को वर्तमान परिस्थितियों में शिक्षण संस्थाओं की भूमिका विषय पर ऑनलाइन संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान गुजरात तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. नवीन भाई सेठ ने कहा कि शिक्षण संस्थान समाज की चेतना का केंद्र होते हैं। आपदाओं की घड़ी में हमारी शिक्षण संस्थाओं ने नवाचार कर देश और समाज हित में अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी ने कहा कि कोरोना महामारी के साथ देश में दो तूफानी आपदाएं भी आईं, किंतु हमारी शिक्षण संस्थाओं ने अपने सकारात्मक कार्यों से समाज को जो सहयोग दिया वह प्रशंसनीय है।
संगोष्ठी में डॉ. अनिल सहस्त्रबुद्धे ने बताया कि हम तकनीक के माध्यम से शिक्षकों को प्रशिक्षित कर रहे हैं। शिक्षक, विद्यार्थी की क्षमता एआई तकनीक से पहचान सकेंगे। संगोष्ठी में शारदा समूह झाबुआ के ओमप्रकाश शर्मा, स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय सागर के कुलाधिपति डॉ. अजय तिवारी, अमृता विश्वविद्यालय केरल के डॉ. आर भवानी राव, संस्कृत विश्वविद्यालय मथुरा के कुलपति डॉ. राणा सिंह, त्रिपुरा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गंगा प्रसाद, एनआईटी. त्रिपुरा के डायरेक्टर डॉ. एचके शर्मा सहित देश के बीस महत्वपूर्ण शिक्षण संस्थाओं के संचालकों ने कोरोना काल में उनकी संस्थाओं द्वारा किए गए सेवा कार्यों का प्रस्तुतिकरण दिया। संचालन डॉ. चंद्रशेखर कछावा और समीर कौशिक ने किया।