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नारियल कांड में तकनीकी ऑडिट टीम का गठन, 13 को होगी जांच

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सड़क की जांच करेगी तकनीकी ऑडिट टीम
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बिजनौर। नारियल कांड में तकनीकी ऑडिट टीम भी सड़क की जांच करेगी। तीन सदस्यीय टीम का गठन हो चुका है। 13 दिसंबर को जांच टीम नहर पटरी सड़क पर पहुंचेगी। सड़क की जांच करने वाली यह तीसरी टीम होगी। विभागीय जांच कमेटी भी निर्माण सामग्री का नमूना लेकर जांच के लिए भेज चुकी है।
सिंचाई खंड बिजनौर की ओर से नहटौर शाखा नहर पटरी पर बनाई जा रही सड़क पर नारियल कांड होने के बाद डीएम उमेश मिश्रा ने मंडलायुक्त को पत्र भेजकर टेक्निकल ऑडिट कमेटी से जांच कराने की सिफारिश की थी। जिस पर मंडलायुक्त ने लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिशासी अभियंता समेत तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। यह टीम 13 दिसंबर को नहर पटरी सड़क पहुंचेगी, जिसे लेकर भी सिंचाई विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
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लैब से रिपोर्ट आने का इंतजार
सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता आरपी सिंह ने विभागीय जांच कराने के लिए दो सदस्यीय टीम का गठन किया था। पिछले दिनों यह टीम जांच के लिए भेजी और निर्माण सामग्री का नमूना लेकर जांच के लिए बरेली लैब भेज दिया है। जिसकी रिपोर्ट आने का इंतजार है।
अभी लैब तक ही नहीं पहुंचा पहला नमूना
दो दिसंबर को सड़क पर नारियल कांड के बाद डीएम के आदेश पर लोकनिर्माण विभाग ने सबसे पहले जांच की थी। निर्माण सामग्री का नमूना लेकर मेरठ लैब भेजा जाना था लेकिन कागजी प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण यह अभी बिजनौर में ही पड़ा है।
जांच पूरी होने तक झालू में नाला निर्माण पर लगी रोक
बिजनौर। झालू में नगर पंचायत की ओर से बनाए जा रहे नाले के निर्माण पर जांच पूरी होने तक रोक लगा दी गई है। अभी तक की जांच में पांच बिन्दुओं पर गड़बड़ी पकड़ में आ चुकी है। भ्रष्टाचार के इरादे से पूरी टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी सामने आ रही है।
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एडीएम प्रशासन ने एडीएम सदर विक्रमादित्य सिंह मलिक को जल्द जांच पूरी कर रिपोर्ट देने के लिए कहा है। बता दें कि एसडीएम सदर ने शिकायत पर झालू पहुंचकर नाला निर्माण में लग रही ईंटों को बजाते हुए फोड़ दिया है। ये सोयम दर्जे की ईंट लगाई जा रही थी, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है। वहीं डेढ़ किलोमीटर लंबे नाले की सभी फाइलों को एसडीएम अपने साथ ले आए थे, जिनकी जांच कर रहे हैं। एसडीएम सदर के मुताबिक पांच बिन्दुओं पर गड़बड़ी पकड़ में आ चुकी है। ई टेंडरिंग से बचने के लिए नाले को कागजों में कई हिस्सो में बांट दिया गया। पांच पांच लाख से कम के टेंडर हुए। बताया कि सड़क के बायीं ओर का नाला नौ हिस्सों में बांटा गया जबकि सड़क से दायीं ओर का नाला 11 हिस्सों में बांटा गया। निविदाओं में एफडीआर नहीं लगी थी। टेंडर वेल्यू में भी गड़बड़ी सामने आई है। ईंट सोयम दर्जे की होना और नाले की दीवार ऊपर्र 14 इंच और नीचे 9 ईंच बनाए जाना सामने आ चुका है। फिलहाल नाला निर्माण की विस्तृत जांच जारी है, जिसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।
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