धामपुर। कॉमर्शियल गैस सिलिंडरों की आपूर्ति पिछले कई दिनों से ठप होने से नगर से अधिकांश रेस्टोरेंट, ढाबा संचालकों को भट्ठी के लिए 25 सौ रुपये क्विंटल के हिसाब से टिकली का कोयला और 1200 रुपये प्रति क्विंटल के रेट पर लकड़ी खरीदने को विवश होना पड़ रहा है।
बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से शनिवार को बीआरसी केंद्र पर शिक्षकों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ है। प्रशिक्षण में शामिल शिक्षकों के लिए भोजन भी गैस सिलिंडरों के स्थान लकड़ी के चूल्हों पर पकाया गया। कारीगरों का कहना है कि जैसे हालत अब पैदा हो गए है, ऐसे कभी पहले नहीं देखे। मांग के अनुरूप भरपूर सिलिंडर आसानी से मिल जाते थे। कारीगरों मनोज कुमार, वीर बहादुर सिंह, बासुराम आदि ने बताया कि गैस सिलिंडरों का टोटा है। काम तो करना ही है। इसलिए उन्हें मजबूरी में लकड़ी के चूल्हों पर खाना पकाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
उनका कहना है किलकड़ी के चूल्हे पर खाना पकाने में भारी दिक्कत हो रही है। गैस सिलिंडरों पर खाना पकाना सस्ता है। समय भी कम लगता है और परेशानी भी नहीं झेलनी पड़ती। खाने में कचौड़ी बंद कर दी गई हैं। रोटी बनाने के लिए तंदूर लगाया गया है। रोडवेज डिपो के निकट गणपति भोजनालय के स्वामी नरेंद्र कुमार का कहना है कि उन्होंने नाश्ता बनाने का काम बंद कर दिया। भोजन में भी कई आइटम बनाने कम कर दिए है।
शादी के लिए भी नहीं मिल रहे सिलिंडर
सरकथलसानी स्कूल की शिक्षक मीनाक्षी रानी का कहना है कि उन्हें मिड डेल मील पकाने को भी ऑनलाइन के बाद सिलिंडर नहीं मिल रहा है। नवादा केशों के राजपाल सिंह का कहना है कि उनकी पुत्री की शादी 19 अप्रैल की है। पूर्ति विभाग को 15 सिलिंडरों के लिए प्रार्थना पत्र दे रखा है लेकिन कुछ नहीं हुआ। नसीरदिवाला के श्याम सिंह सैनी का कहना है कि उनके बेटे की बुधवार की शादी है लेकिन सिलिंडर नहीं मिल रहे।
पूर्ति विभाग के एआरओ आलोक कुमार वशिष्ठ का कहना है कि समस्या के निदान के लिए मांग की जा रही है। वर्तमान में कॉमर्शियल सिलिंडरों का टोटा है। उन्होंने लोगों से हालात से समझौता करने का सुझाव दिया है।