उधर, ससुरालयों ने दहेज की मांग की। दहेज उत्पीड़न से तंग आकर पीड़िता ने रिपोर्ट दर्ज कराने का प्रयास किया। तमाम कोशिशों के बाद एडीजी के आदेश पर थाना हल्दौर में 12 सितंबर को दहेज एक्ट, तीन तलाक, दुष्कर्म और गर्भपात जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया। यह केस दर्ज हुआ तो विवेचना की जिम्मेदारी झालू चौकी प्रभारी धर्मेंद्र गौतम को मिली।
आरोप है कि केस में विवेचना के लिए दरोगा ने मसूरी के एक होटल में पहुंचकर जांच-पड़ताल की। पीड़िता भी अपनी एक दोस्त को लेकर वहां पहुंची। दोनों ही दरोगा की कार मैं बैठकर मसूरी गईं।
होटल में मुआयना करने के साथ ही दरोगा की नियत भी बदल गई। देहरादून तक आते-आते दारोगा ने धारा बनाए रखने के लिए पीड़िता को अनैतिक ऑफर किया। सिर्फ इतना ही नहीं पीड़िता के साथ-साथ किसी महिला दोस्त को भी संग लाने के लिए दरोगा ने दबाव बनाया। हालांकि पीड़िता ने विवेचक की बदनियति को भांप लिया।
महिला का आरोप था कि दरोगा ने उसके साथ अश्लील बातें कीं और बार-बार रात में संग रुकने के लिए दबाव बनाया।
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