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कदम-कदम पर निगरानी, फिर भी कालाबाजारी

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कदम-कदम पर निगरानी, फिर भी कालाबाजारी
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बिजनौर। गरीबों को दिए जाने वाली राशन की कालाबाजारी के सभी इंतजाम राशन डीलरों की चालाकी के आगे धरे रह जाते हैं। राशन डीलर अपनी मर्जी से उपभोक्ताओं को राशन देते हैं। ऐसे मामलों में बहुत शिकायत के बाद ही राशन डीलरों पर कार्रवाई की जाती है।
दस साल पहले राशन बनाने और वितरण को लेकर कोई खास पुख्ता इंतजाम नहीं किए जाते थे। राशन के लिए केवल राशन कार्ड की जरूरत होती थी। कोई भी जाकर राशन ले आता था। राशन डीलर भी कई बार लोगों के राशन कार्ड बनाकर अपने पास ही रखते थे। इससे राशन की कालाबाजारी होती थी। बाद में राशन कार्ड में महिला को मुखिया बनाया गया। राशन कार्ड में जितने भी सदस्य दर्ज होते थे, सभी के आधार नंबर नंबर राशन कार्ड में दर्ज किए गए। इसके बाद राशन बांटने के लिए बायोमैट्रिक मशीन लाई गई। बायोमैट्रिक मशीन पर अंगूठा लगाकर राशन बांटने की व्यवस्था की गई। जिन लोगों के आधार नंबर राशन कार्ड में दर्ज हैं, उनमें कोई भी बायोमैट्रिक मशीन पर अंगूठा लगाकर राशन ले सकता है। यह सब व्यवस्था बायोमैट्रिक मशीन पर अंगूठा लगने से पहले की हैं। अंगूठा लगने के बाद कितना राशन देना है, देना है या नहीं देना है यह सब राशन डीलर के हाथ में होता है। हालांकि राशन वितरण नोडल अफसरों की मौजूदगी में करने का प्रावधान है लेकिन नोडल अफसर वहां से नदारद रहते हैं। राशन डीलर अपनी मनमर्जी से लोगों को राशन देते हैं।
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आ चुकी हैं धांधली की कई वीडियो
पिछले एक साल में कई राशन डीलरों की वीडियो आ चुकी है, जिनमें वे प्रति व्यक्ति कम राशन देने की बात खुद कहते नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि सभी अफसरों को भी हिस्सा जाता है। ऐसे मामलों में केवल राशन डीलरों के खिलाफ ही कार्रवाई होती है और किसी के खिलाफ नहीं। कई बार तो राशन डीलर अंगूठे का निशान लगवाकर पूरा राशन हजम कर जाते हैं।
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होती है कार्रवाई
जिला पूर्ति अधिकारी मनीष कुमार का कहना है कि राशन वितरण की व्यवस्था फूलप्रूफ है। अगर कोई राशन वितरण में गड़बड़ी करता है तो उसके खिलाफ विभाग सख्त कार्रवाई करता है।
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