बिजनौर। तीन दशक पहले के मुकाबले आज के बिजनौर में काफी फर्क आ गया है। कभी जिले में केवल छोटी मोटी दुकानें होती थीं और अब मॉल कल्चर ने जड़े जमा ली हैं। न केवल शहर वरन शहर की सीमा के बाहर भी बड़ी-बड़ी कंपनियों के शोरूम जिले में खुल चुके हैं।
कभी बाजार केवल शहरों में होता था। गांवों में केवल परचून, कपड़े आदि की ही दुकान होती थीं। लेकिन अब यह पुरानी बात हो चुकी है। एक दशक में जिले के बाजार में अभूतपूर्व तरक्की हुई है। जिले में शॉपर्स प्राइड मॉल खुला तो लोगों लगा कि यह काफी बड़ी उपलब्धि है लेकिन अब ये बातें भी पुरानी हो गईं। शहरों में जगह खत्म हुई तो अब शहर की सीमा से बाहर गांवों की ओर बड़ी बड़ी कंपनी के कपड़ों, जूतों, मोबाइल के शोरूम खुल चुके हैं। किसी संपन्न परिवार में शादी होने पर परिजन सामान की शॉपिंग करने के लिए मेरठ का रुख करते थे लेकिन अब जिले में लगभग हर ब्रांड का माल उपलब्ध है।
जिले में पहले केवल चीनी मिलों का जाल था। नगीना का काष्ठकला उद्योग ज्यादा विकसित नहीं था। आज काष्ठकला उद्योग से विदेशों को हर साल 250 से 300 करोड़ का माल निर्यात होता है। शेरकोट के पेंटिंग के ब्रश उद्योग ने जनपद को पूरे देश में अलग पहचान दिलाइ। सड़कों पर महंगी कारें और बाइक दौड़ रही हैं। युवा उपभोक्ता ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़ चुका है। जिले में हर रोज ऑनलाइन शॉपिंग से लाखों का सामान मंगवाया जा रहा है। कंपनियों के डिलीवरी ब्वॉय की बाइक दिन भी उपभोक्ताओं को उनका माल पहुंचाने में लगे रहते हैं। शेरकोट का ब्रश उद्योग भी विदेशों में लगातार चमक रहा है। जिले में उद्योगों में इजाफा हो रहा है। नए-नए और महंगे शोरूम खुलने से जनता को भी रोजगार मिल रहा है।
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कारों, बाइकों की होती है जबरदस्त बिक्री
जिले में शोरूम खुले ही नहीं उनमें लगातार बिक्री भी हो रही है। जिले में बुलट बाइक का इतना क्रेज है इसका स्टॉक इस बार दीपावली पर खत्म हो गया। दीपावली पर एक ही दिन में 500 बुलट बिक गई। कोरोना काल में निर्यात प्रभावित होने पर अब काष्ठकला उद्यमियों ने लोकल पर फोकस किया तो लोकल में भी उन्हें बाजार मिलने लगा है।
व्यापार के मौके बढ़े
व्यापारी नेता मनोज कुच्छल का कहना है कि जिले में व्यापार के मौके बढ़े हैं। नए शोरूम खुले हैं तो पुराने व्यापारियों की चुनौती बढ़ी हैं। ऑन लाइन शॉपिंग के समय में भी व्यापारी उपभोक्ताओं को बाजार में आने के लिए लगातार ललचा रहे हैं।